पीजीपी- एसएम | भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ

पीजीपी- एसएम

MBA-SMसतत प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम इस दर्शन पर बल देता है कि व्यवसाय समाज में अंतर्निहित है और इसे अलग नहीं किया जा सकता है। इसलिए इसका उद्देश्य आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर समग्र दृष्टिकोण के साथ प्रबंधन पेशेवरों को विकसित करना है। सामान्य प्रबंधन पाठ्यक्रमों की प्रस्तुति के अतिरिक्त,पीजीपीएसएम का पाठ्यक्रम प्रबंधन शिक्षा में प्रणाली विचार, सामाजिक उद्यमशीलता, बाहरी कारक, जीवनचक्र प्रबंधन, हितधारक प्रबंधन और सार्वजनिक नीति पर विशेष पाठ्यक्रम पेश करता है।

कार्यक्रम के उद्देश्य

सतत प्रबंधन में स्नातकोत्तर कार्यक्रम (पीजीपीएसएम) छात्रों को सक्षम बनाने के लिए तैयार किया गया है:

  • विभिन्न दृष्टिकोणों से सामाजिक विकास को समझना
  • व्यवसाय प्रबंधन के कार्यात्मक क्षेत्रों में ज्ञान और कौशल प्राप्त करना
  • सक्रिय रूप से व्यापार के उद्देश्यों और जिम्मेदारियों पर बढ़ती विश्वव्यापी बहस में भाग लेना
  • सामाजिक परिवर्तन में योगदान देने वाले, स्व-जागरूक तथा सामाजिक और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यक्तियों की सूचना प्राप्ति
  • • यथास्थिति को चुनौती देना तथा सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों से समझौता किए बिना व्यवसायों के लिए और अवसरों पर नए सुझाव देना

सतत प्रबंधन क्यों

आज व्यवसाय तेजी से स्थिरता की चिंताओं द्वारा प्रेरित हो रहा है। कई अग्रणी परामर्श और मीडिया संस्थान जैसे फोर्ब्स और फॉर्च्यून द्वारा किए गए सर्वेक्षणों के परिणाम दर्शाते हैं कि कोई भी व्यवसाय अपने संचालन में स्थिरता सिद्धांतों और प्रथाओं को शामिल किए बिना भविष्य में नहीं टिक सकता है। हालांकि, यह कहना आसान और करना कठिन है। इस संदर्भ में सतत प्रबंधन की भूमिका निहित है।

अतीत में, सीमित रूप से ‘स्थिरता’ शब्द,पर्यावरण और सामाजिक चिंताओं के लिए प्रयोग किया जाता था।हाल के वर्षों में एक कठिन अनुभव ने शुरू हुआ है कि व्यवसाय स्वयं को समाज और पर्यावरण से अलग नहीं कर सकते हैं। एक अस्थिर सामाजिक और पर्यावरणीय पारिस्थितिकी व्यवसाय के आचरण को महंगा कर, अनजाने में व्यापार की लाभ रेखा को चोट पहुंचाएगी। इसलिए, व्यापार के नकारात्मक पर्यावरण और समाजशास्त्रीय प्रभाव के खतरे से निपटने का एकमात्र तरीका उन्हें सुधार और उत्कृष्टता के अवसरों में बदलना है।

पीजीपीएसएम भविष्य के प्रबंधकों को इन स्थिरता संबंधित चुनौतियों के निरंतर विकसित और आपसी संवाद आधारित प्रकृति को समझने और एकीकृत तथा समग्र समाधान करने में सक्षम बनाता है।

सततता एक उभरता हुआ क्षेत्र है और आईआईएम लखनऊ भारत में बहुत कम संस्थानों में से एक है याशायद विश्व केबहुत कम संस्थानों में से एक, जिसने सततता प्रबंधन कार्यक्रम का बीड़ा उठाया है। कहने की आवश्यकता नहीं है कि क्षेत्र में निरंतर विकासके साथ हीपाठ्यक्रम का निरंतर विकास अधिक सुसंगत होता है।

कार्यक्रम ऑडियो-वीडियो सक्षम क्लास रूम, पुस्तकालय में पुस्तकों के व्यापक संग्रह और उद्योगों और कॉर्पोरेट नेतृत्वकर्ताओं के लिए तैयार पहुंच के संदर्भ में अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से सुसज्जित है।

व्याख्यान, केस चर्चा, अभ्यास, सेमिनार, भूमिका निर्वहन, प्रबंधन खेल जैसी सुदृढ़ दिनचर्या के साथ-साथ आवेदन उन्मुख भागीदारी सीखने के माध्यम से सैद्धांतिक अवधारणाओं की गहरी समझ छात्रों मंय सुनिश्चित की जाती है। टीम-आधारित असाइनमेंट, टर्म पेपर, प्रोजेक्ट वर्क, प्रस्तुति और कंप्यूटर-आधारित सीखने के तरीके भविष्य में कार्यस्थल में बड़े और कई बार बहु-सांस्कृतिक और बुह-कार्यप्रणाली टीमों को प्रभावी ढंग से काम करने की दिशा में प्रेरित करने हेतु सहयोग करते हैं।

संस्थान यह मानता है कि अपने शिक्षण के माध्यम से छात्रों को एक विशिष्ट स्थान प्राप्त करने में सक्षम बनाता है जो भविष्य के बहुत ही महत्वपूर्ण अवधि को प्रभावित कर सकता है। सामाजिक और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील वैश्विक नागरिकों के विकास पर विशेष बल दिया जाता है। उद्योग नेतृत्वकर्ताओं द्वारा नेतृत्व वार्ता स्थिरता में नवीनतम रुझानों को सामने लाती है और कक्षा में सिखाई गई अवधारणाओं के साथ एक सीधा जुड़ाव स्थापित करने में सहयोग करती है।

शैक्षणिक मूल्यांकन

शैक्षणिक प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली को सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देने के साधन के रूप में देखा जाता है। इसे समस्या समाधान और संगठनात्मक प्रभावशीलता को बढ़ाने के लिए ज्ञान के प्रयोग हेतु छात्रों की क्षमता के आकलन के लिए तैयार किया गया है । मूल्यांकन एक सतत प्रक्रिया है जो असाइनमेंट, प्रश्नोत्तरी, परियोजना कार्य, सम्मेलन प्रस्तुति, मैखिक परीक्षा, मिड-टर्म टेस्ट और अंतिम परीक्षा पर आधारित है।

संबंधित अक्षर ग्रेड के साथ दस-बिंदु ग्रेडिंग स्केल का उपयोग निम्नानुसार किया जाता है:

अक्षर मापदंड A+ A A- B+ B B- C+ C C- D F
अंकीय मापदंड 10 9 8 7 6 5 4 3 2 1 0

टर्म ग्रेड प्वाइंट एवरेज और संचयी ग्रेड प्वाइंट एवरेज की गणना प्रत्येक टर्म में क्रमशः प्रत्येक ग्रेड में और पर प्रत्येक छात्र के क्रेडिट-वेटेड औसत के रूप में की जाती है। कार्यक्रम में निरंतरता के लिए शैक्षणिक मानदंड, द्वितीय वर्ष के लिए पदोन्नति, और डिप्लोमा प्रदान, पीजीपीएसएम निर्देशिका में निर्दिष्ट हैं जो कार्यक्रम को संचालित करने वाली नीतियों और प्रक्रियाओं को पूरा करता है। शैक्षणिक सत्र के प्रारंभ में पंजीकरण के समय सभी छात्रों को यह निर्देशिका प्रदान की जाती है।

पीजीपीएसएम का पाठ्यक्रम सुदृढ़ होने के साथ ही प्रथम वर्ष से ही सततता पर विशेष पाठ्यक्रम के अतिरिक्त सामान्य प्रबंधन संबंधित पाठ को भी शामिल किए हुए है। दूसरे वर्ष में, छात्रों को टर्मIV और V में अच्छी तरह से तैयार किए गए अनिवार्य पाठ्यक्रमों और टर्म VI में वैकल्पिक पाठ्यक्रमों के माध्यम से सततता पर अनुभव प्राप्त होता है।

दो वर्षों में प्रस्तुत पाठ्यक्रम नीचे सूचीबद्ध है

पांच वर्षीय पाठ्यक्रम संरचना
टर्म I टर्म II टर्म III
प्रबंधकीय अर्थशास्त्र सतत प्रबंधन हेतु संचार पर्यावरण एवं संसाधन अर्थशास्त्र
सततता प्रबंधन के सिद्धांत व्यापक-आर्थिक पर्यावरण सततता हेतु व्यापार प्रमाणन
प्रबंधन के लिए मात्रात्मक विश्लेषणI सतत समाधान विकास हेतु रचनात्मकता एवं नवाचार प्रबंधन हेतु मात्रात्मक विश्लेषण II
सतत प्रबंधन हेतु लेखांकन सतत प्रबंधन हेतु वित्तीय निर्णय संगठन रचना (सतत)
सततता हेतु मानवीय आयाम प्रणाली विचार सूचना प्रणाली
संगठनों में व्यवहार पर्यावरण संबंधी कानून एवं नीति क्रेता के व्यवहार की समझ
  सतत विपणन सिद्धांत रणनीतिक प्रबंधन
  संचालन प्रबंधन  
द्वितीय वर्षीय पाठ्यक्रम संरचना
टर्म IV टर्म V टर्म VI
बाहरी कारक एवं वाह्य व्यापार जीवनचक्र प्रबंधन तीन वैकल्पिक पाठ्यक्रम पर्यावरण प्रबंधन या सामाजिक विषय क्षेत्र से
सामाजिक उद्यमशीलता सततता: समाधान एवं रिपोर्ट एकीकृत परियोजना
सतत प्रबंधन हेतु शोध विधियां हितधारक विश्लेषण एवं प्रबंधन  
सततता के लिए एचआरएम एवं उच्च प्रभाव पर्यावरण एवं सामाजिक जोखिम विश्लेषण एवं प्रबंधन  
सतत आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन पर्यावरण वित्त एवं सतत/प्रभाव निवेश  
एकीकृत परियोजना सार्वजनिक नीति प्रक्रिया एवं संस्थान  
  एकीकृत परियोजना  

दूसरे वर्ष में पाठ्यक्रम के अभिन्न अंग के रूप में तीन टर्म (9 महीने तक) के लिए एक एकीकृत परियोजना संचालित की जाती है। समानांतर में चल रहे कार्य के साथ, छात्रों को उद्योग के साथ सजीव परियोजनाओं पर कार्य करने के लिए प्रत्येक सप्ताह में एक दिन का अवकाश मिलता है। संकाय द्वारा समय-समय पर किया जाने वाला मूल्यांकन यह सुनिश्चित करता है कि छात्र परियोजना को पूरा करने की दिशा में रहें। छात्र अक्षय ऊर्जा, स्मार्ट सिटी, संसाधन अनुकूलन, हरित विपणन, सीएसआर पोर्टफोलियो प्रबंधन आदि परियोजनाओं में शामिल होते हैं। वे टाटा सस्टेनेबिलिटी ग्रुप, सॉफ्ट बैंक, एनटीपीसी, जीआईजेड, आईटीसी इन्फोटेक, वेल्लूरी टेक्नोलॉजी सेलेर, वेदांत और विश्व बैंक जैसे प्रमुख संगठनों से जुड़े हैं।

पीजीपीएसएम पाठ्यक्रम के इस अनूठे पहलू को भर्तीकर्ताओं ने काफी सराहा है। सबसे पहले, एकीकृत परियोजना के माध्यम से प्राप्त व्यवहारिक अनुभव छात्रों को एक अद्वितीय व्यावसायिक की दिशा में आगे बढ़ाने का कार्य करता हैजो कक्षाओं की परिधि से आगे तक जाता है। दूसरे, भर्तीकर्ता अक्सर आठ सप्ताह के ग्रीष्मकालीन इंटर्नशिप में सार्थक परियोजनाओं को सौंपने और एक उम्मीदवार की उपयुक्तता का आकलन करने के लिए बहुत न्यून पाते हैं।

सामग्री शीघ्र उपलब्ध कराई जाएगी।

उम्मीदवारों के पास न्यनतम दो वर्षों का पेशेवर अनुभव के साथ न्यूनतम 50% अंकों (एससी / एसटी / पीडब्ल्यूडी श्रेणी में 45%) या समकक्ष के साथ किसी भी विषय में स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।

शॉर्टलिस्ट किए गए अभ्यर्थियों को“उद्देश्य कथन” जमा करना होगा, जिसके लिए फॉर्म उपलब्ध कराया जाएगा।

क्र.सं. विषय डाउनलोड
1. नीतिसाइज: 200 केवी।भाषा :अंग्रेजी। अपलोडिंग दिनांक: 04/08/2018 देखने के लिए यहां क्लिक करें।

कैट विज्ञापन आमतौर पर जुलाई या अगस्त के महीने में राष्ट्रीय दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित होते हैं।

सामान्य प्रवेश परीक्षा एक कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) है। कैट के बारे में अधिक जानकारी के लिए, पर जाएंhttp://www.iimcat.ac.in पर जाएं

कैट में प्रदर्शन, शैक्षणिक उपलब्धि और प्रासंगिक कार्य अनुभव के आधार पर उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाता है। फरवरी के अंत में लिखित योग्यता परीक्षा (डब्ल्यूएटी) और व्यक्तिगत साक्षात्कार (पीआई) बैंगलोर, हैदराबाद, कोलकाता, लखनऊ, मुंबई और नई दिल्ली में आयोजित किए जाते हैं। अंतिम चयन कैट में प्रदर्शन, शैक्षणिक उपलब्धि, कार्य अनुभव और लिखित योग्यता परीक्षा (डब्ल्यूएटी) और व्यक्तिगत साक्षात्कार (पीआई) में प्रदर्शन पर आधारित होता है।

क्र.सं गतिविधियां समय
1 विज्ञापन जारी करने की तिथइ 29 जुलाई 2018 (रविवार)
2 कैट के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 08 अगस्त 2018 to 19 सितंबर 2018 ,05:00 PM
3 प्रवेश पत्र डाउनलोड विंडो 24 अक्टूबर 2018 to 25 नवम्बर 2018
4 परीक्षा तिथि 25 नवंबर 2018 (रविवार)
5 कैट परिणाम जारी करने की तिथि जनवरी माह का दूसरा सप्ताह 2019 (परिवर्तनीय)

डिमांड ड्राफ्ट :

ऑनलाइन ट्रांसफर :

वर्तमान कॉर्पोरेट परिदृश्य में “ग्लोकल” परिप्रेक्ष्य शामिल है जिसमें स्थानीय जोखिमों और चुनौतियों की गहन समझ और समग्र विकास की दिशा में प्रयास करने के लिए एकीकृत वैश्विक रणनीति शामिल है। भाप्रसं. लखनऊ में हम शैक्षिक कार्यक्रमों और अनुसंधान परियोजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के लिए प्रतिबद्ध हैं जो वैश्विक मुद्दों की समझ को बढ़ाएंगे। भाप्रसं.लखनऊ विश्व भर के साझेदार बिजनेस स्कूलों के साथ अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों को डिजाइन, विकसित और कार्यान्वित करके विश्व के बाकी हिस्सों के साथ संवाद को बढ़ावा दे रहा है। हमारे छात्र और संकाय नियमित रूप से सम्मेलनों, संगोष्ठी, और विचार विनिमय कार्यक्रमों जैसे वैश्विक संवाद मंचों पर भागीदारी करते हैं।

पीजीपीएस का यह अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम मापांक प्रतिभागियों को श्रेष्ठ प्रथाओं तथा सुदृढ़ प्रशासनिक संरचनाओं के प्रति प्रेरित करने का कार्य करता है, जो अन्य यूरोपीय देशों, विशेषकर स्केंडिनेविया में विद्यमान है।

कोपेनहेगन बिजनेस स्कूल लिनिअस विश्वविद्यालय और अलबोर्ग विश्वविद्यालय जैसे विश्व प्रसिद्ध संस्थानों में दो सप्ताह का अनिवार्य कार्यक्रम के रूप मंप सार्थक अनुभव को समृद्ध करने के उद्देश्य से है। सुदृढ़ शैक्षणिक अनुसूची जागरूक तथा उद्योग बातचीत के साथ अत्यधिक पूरक है। आईकेईए, डोंग एनर्जी और रॉकवूल जैसे संगठनों के विशेषज्ञ, जिन्होंने अपने संबंधित क्षेत्रों में स्थिरता के लिए उच्च मानक स्थापित किए हैं, छात्रों के साथ निकट संवाद करते हैं और विभिन्न दृष्टिकोण साझा करते हैं। छात्र स्थानीय नगर निकाय और नागरिक समूहों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ते हैं जो प्रायः सतत जीवन के प्रति समाज में व्यवहारिक परिवर्तन लाने में सहायक होते हैं। कार्यक्रम प्रतिभागियों और स्थानीय समुदाय के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक मंच है।

क्र.सं. विषय डाउनलोड
1. शुल्क संरचना- शैक्षणिक वर्ष 2019-21 के लिए पीजीपीएसएम-I एवं IIआकार: 40.4 केबी।भाषा: अंग्रेजी। अपलोडिंग दिनांक: 18/05/2019 Click here to View

वित्तीय सहयोग

संस्थान की वित्तीय सहायता योजनाओं का उद्देश्य पर्याप्त वित्तीय सहायता के अवसर प्रदान करना है, ताकि किसी भी छात्र की कार्यक्रम संबंधी निरंतरता वित्तीय बाधाओं से प्रभावित न हो। वर्तमान में उपलब्ध योजनाएं हैं:

आवश्यकता आधारित भाप्रसं. छात्रवृत्त:

संस्थान ने योग्यता और पारिवारिक आय के आधार पर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की स्थापना की है। आरक्षित वर्ग से संबंधित कोई भी छात्र, जिनकी वर्ष 2016-17 के लिए कुल वार्षिक सकल पारिवारिक (स्वयं, माता-पिता, पति/पत्नी) (1.4.2016-31.3.2017) आय रु.3,00,000.00/- से अधिक नहीं, ऐसे छात्र इस छात्रवृत्ति हेतु विचारणीय हैं। एक समय में एक शैक्षणिक वर्ष की अवधि के लिए लाभार्थियों को योग्यता के क्रम में पात्र उम्मीदवारों से चुना जाता है। छात्रवृत्ति संस्थान द्वारा वर्ष में लागू कुल शुल्क में सेशिक्षण शुल्क घटक को शामिल करती है, और शैक्षणिक प्रदर्शन के निर्धारित मानकों को बनाए रखने के अधीन है।

अन्य

विद्यार्थी केन्द्र सरकार, राज्य सरकार तथा अन्य दूसरे उच्च शिक्षा हेतु संस्थानों द्वारा जारी विभिन्न छात्रवृत्तियों का लाभ उठा सकते हैं। उक्त से संबंधित विवरण राष्ट्रीय (तथा राजकीय) छात्रवृत्ति पोर्टल है http://www.scholarships.gov.in/

शुल्क भुगतान विकल्प

डिमांड ड्राफ्ट :

ऑनलाइन ट्रांसफर :

Final Placements (2015-17 Batch)

Indian Institute of Management-Lucknow is pleased to release the data related to final placement of the first batch of Post Graduate Programme in Sustainable Management (PGPSM). PGPSM was inaugurated in 2015 and the first batch comprised of 19 students with an average work experience of 4.5 years. The final placement witnessed the participation of organizations from diverse sectors involved in sustainability related work such as consulting, energy, urban transport, apparel, financial services, and social sector.

One student opted out of the placement process to pursue higher education. Overall 16 students have received job offers from organizations in consulting (EY, KPMG, PwC), energy (Energy Efficiency Services Limited, Mytrah Enegry, Vikram Solar), financial services (Tres Vista), and social sector (Tata Strive, Tata Trust). Other companies which participated in the placement process include Accenture, Cargill Foods, Lavaasa, McKinsey & Co., Solaron, Treeni, and UMTC. Maximum offers were made by the consulting firms (50%), followed by energy (25%),

social sector (19%), and financial services (6%). Roles on offer included senior consultants, business development, business strategy etc. Two students are in touch with organizations to arrive at a final decision.

IIM Lucknow is the first IIM and one of select management institutes in India to offer a full time residential programme in the field of sustainability. The heartening response from the industry establishes IIM Lucknow as the preferred recruitment partner for sustainability related roles in India and reaffirms the trust organizations have shown in IIM Lucknow over the years.

Prof Sourindra Bhattacharjee, Chairperson of PGPSM Placements said “We are glad to that we were able to build on the foundations of successful summer placements of the first two batches of PGPSM. The institute provided a platform for the students to explore career in diverse sectors related to sustainability and the response from the industry was an indicator of the student quality, academic rigour, and values of IIM Lucknow“.

Summer Placements (2016-18 Batch)

Summer internships have been offered to the students by a wide range of companies from various sectors. Mahindra, Tata Sustainability Group, Wipro, Cairn Energy, PwC, KPMG, Azim Premji Foundation, Wipro Earthian-CSTEP, BIOME, Valluri Technology Accelerators, Sweep Enviro, UPL and Biocon are some of the companies that have recruited interns in varied roles in sustainability. Across the batches, roles offered have been in the domain of smart city consulting, sustainability reporting, rural development, social and community inclusion, renewable energy solutions, corporate social responsibility, environment, waste management, carbon neutrality and pricing.