पीजीपी | भारतीय प्रबंध संस्थान लखनऊ

पीजीपी

"सुदृढ़ सिद्धांत से अच्छा व्यवहार प्रवाहित होता है।" - यह आईआईएम लखनऊ के स्नातकोत्तर कार्यक्रम (पीजीपी) का सिद्धांत वाक्य है।

स्नातकोत्तर कार्यक्रम भविष्य के व्यवसाय प्रबंधकों के लिए आवश्यक दृढ़ संकल्पनात्मक बुनियादी सिद्धांतों तथा कौशलयुक्त पेशेवर प्रबंधकों के विकास हेतु तैयार किया गया है। इसके साथ ही इन प्रबंधकों में व्यावसायिक भविष्य निर्धारण हेतु दृष्टि विकसित किया जाता है।

यह दो वर्षों का, पूर्णकालिक एवं आवासीय कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले छात्रों को प्रबंधन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्रदान किया जाता है।

कार्यक्रम का उद्देश्य स्नातकोत्तरों को निम्नानुसार समर्थ बनना है:

  • आधुनिक समाजों एवं उनके विशिष्ट मूल्यों के सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी तथा पारिस्थितिकीय वातावरण के प्रति समझ विकसित करना।
  • प्रबंधन के बुनियादी विषयों एवं कार्यात्मक क्षेत्रों में प्रचलित अत्याधुनिक ज्ञान व कौशल को प्राप्त करना।
  • परिवर्तन को सुगम बनाने तथा संगठनात्मक प्रणालियों की प्रभावशीलता तथा दक्षता में वृद्धि के लिए विश्लेषणात्मक एवं नवोन्मेषी दृष्टिकोण के साथ-साथ कौशल विकसित करना।
  • सामाजिक कल्याण के लिए आदर्श एवं सक्रिय दृष्टिकोण विकसित करना।

पीजीपी कार्यक्रम, छात्रों को भविष्य के लिए तैयार रहने हेतु लगातार सार्थक चुनौतियां प्रस्तुत करता है। उद्योग से प्राप्त प्रतिक्रिया के अनुरूप प्रत्येक वर्ष पाठ्यक्रमों को विकसित किया जाता है। प्रत्येक वर्ष नए पाठ्यक्रम प्रभावी विधि से सम्मिलित किए जाते हैं। इस प्रकार के परिवर्तन, विश्व में किसी विशेष आवश्यकता के प्रारंभ को चिन्हित करते हुए नवीनतम अवधारणाओं एवं मानदंडों को पाठ्यक्रम में शामिल करने का माध्यम बनते हैं।

पीजीपी छात्रों को विभिन्न दायित्वों के वहन के लिए तैयार करता है तथा उनसे अपेक्षित त्वरित प्रदर्शन के लिए ऊर्जावान बनाता है। समस्त मानदंडों पर यह पाठ्यक्रम सुदृढ़ है। शैक्षणिक कार्य (असाइनमेंट), सजीव एवं प्रेरित परियोजनाएं, समयानुसार मूल्यांकन तथा अकादमिक कार्यक्रम यह सुनिश्चित करते हैं कि छात्र समय को प्रबंधित करते हुए कुशलतापूर्वक व प्रभावी ढंग से काम करने में कौशल विकसित कर रहे हैं। यही कारण है कि आईआईएम लखनऊ के प्रबंधक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अन्यों की तुलना में श्रेष्ठ सिद्ध होते हैं।

"अनावश्यक शिक्षा अब ज्ञान की श्रेणी में नहीं आता है। यही कारण है कि आईआईएम लखनऊ लगातार प्रस्तावित पाठ्यक्रमों को अद्यतन करता रहता है। इस प्रकार से, छात्रों को प्रबंधन क्षेत्र में नवीनतम विकास एवं उपायों की उपलब्धता सुनिश्चित करता है।

यह संस्थान केस-आधारित शिक्षण पद्धति का पालन करता है। छात्रों को वास्तविक संसार में पेश आने वाली स्थितियों की एक झलक देकर, हम उन्हें प्रारंभ में अव्यवस्थित दिखने वाली स्थिति में व्यवस्था तलाशने में सहयोग करते हैं। इसके परिणामस्वरूप एक व्यक्ति जो न केवल किसी भी असंरचित स्थिति में सार्थक प्रतिक्रिया दे सकता है बल्कि उसे व्यावहारिक तौर पर भी क्रियान्वित कर सकता है।

पूर्ण रूप से सक्षम व्याख्यान कक्ष तथा अत्याधुनिक ऑडियो-विजुअल (दृश्य-श्रव्य) तकनीके हमारे छात्रों को अध्ययन के सभी पहलुओं को प्रस्तुत करने में सहायता करती हैं। नियमित प्रस्तुतियां उन्हें जानकार तथा प्रेरक वक्ता बनाने में मदद करती हैं।

वैश्विक व्यापार क्षेत्र रूपांतरण की प्रक्रिया से गुजर रहा है जिसके निर्णायक परिणाम के बारे में केवल अनुमान लगाया जा सकता है। लेकिन एक बात तय है कि भविष्य चाहे जो कुछ भी हो, आईआईएम लखनऊ के छात्र इसके सृजन में योगदान देंगे। उनका ज्ञान ठहरा हुआ नहीं हैं - और ऐसे माहौल में जहां अक्सर किसी को भी श्रेष्ठ बने रहने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। उस परिस्थिति में, यह संस्थान गर्व के साथ इस तथ्य को रखना चाहता है कि उसके छात्र आत्मविश्वास के साथ अन्यों से बेहतर सिद्ध होते हैं।

स्नातकोत्तर कार्यक्रम की विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • कार्यक्रम के घटकों के बीच अधिकतम सामंजस्य उत्पन्न करने के लिए इसे एकीकृत रूप में डिजाइन किया गया है।
  • कार्यक्रम के तहत केवल ज्ञान प्राप्ति की बजाय ज्ञान के समावेश पर बल दिया जाता है।
  • कार्यक्रम के तहत केवल ज्ञान प्राप्ति की बजाय ज्ञान के समावेश पर बल दिया जाता है।
  • पर्यावरणीय प्रभाव से निपटने के लिए संवेदनशीलता तथा दक्षता पर जोर दिया जाता है ताकि संगठनात्मक हित को बढ़ाने के साथ-साथ अच्छे कॉर्पोरेट व पेशेवर नागरिकता को बढ़ावा देने वाले साधनों पर भी बल दिया जा सके।
  • उभरते प्रबंधकीय उपाय एवं प्रौद्योगिकियों के उपयोग के साथ ही छात्रों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है।
  • कार्यक्रम का उद्देश्य सफल प्रबंधकीय पेशे के लिए निरंतर सीखने के महत्व को पहचानते हुए 'सीखने के लिए सीखना' की क्षमता छात्रों में विकसित करना है।
  • कार्यक्रम सामाजिक प्रणाली को पोषित करने का प्रयास करता है जो भारतीय संदर्भ में एक पेशेवर प्रबंधक के लिए उचित मूल्य प्रणाली को समझने में सहायक हो।

इस उद्देश्य के अनुरूप, पाठ्यक्रम की प्रकृति के आधार पर उचित निर्देशक पद्धतियों के संयोजन को प्रयोग में लाया जाता है। प्रयुक्त शिक्षण विधियों की श्रृंखला में व्याख्यान, मामलों की परिचर्चा, अभ्यास, संगोष्ठी, भूमिका निर्वहन, प्रबंधकीय स्पर्धा, असाइनमेंट, टर्म पेपर, परियोजना कार्य, ऑडियो-विजुअल सहयोग एवं कंप्यूटर-आधारित शिक्षण विधियां शामिल हैं।

अकादमिक मूल्यांकन

अकादमिक प्रदर्शन मूल्यांकन प्रणाली को शिक्षण प्रक्रिया को बढ़ावा देने के साधन के रूप में देखा जाता है। इसे छात्र को समस्या सुलझाने तथा संगठनात्मक प्रभावशीलता में वृद्धि के लिए ज्ञान उपयोग करने की दक्षता का आकलन करने के लिए बनाया गया है। मूल्यांकन असाइनमेंट, क्विज, परियोजना कार्य, संगोष्ठी प्रस्तुति, मौखिक परीक्षा, मिड-टर्म टेस्ट और अंतिम परीक्षा आधारित एक सतत प्रक्रिया है।

दस-बिंदु आधारित श्रेणीकरण मानदंड का उपयोग अक्षरों के प्रतीक रूप निम्नलिखित प्रकार से किया जाता है:

प्रतीकाक्षर A+ A A- B+ B B- C+ C C- D F
मूल्यांकन 10 9 8 7 6 5 4 3 2 1 0

टर्म ग्रेड अंक औसत तथा कुल ग्रेड प्वाइंट औसत प्रत्येक टर्म में जोड़े जाते हैं, किसी छात्र का व्यक्तिगत ग्रेड, उसके संबंधित प्रत्येक टर्म में तथा तक का क्रेडिट-वेटेड औसत के रूप में गणना की जाती है। कार्यक्रम में निरंतरता, द्वितीय वर्ष प्रवेश, तथा डिप्लोमा प्राप्ति को पीजीपी नियमावली में निर्दिष्ट किया गया है जो कार्यक्रम को नियंत्रित करने वाली नीतियों व प्रक्रियाओं से संबंधित है। यह नियमावली पुस्तिका अकादमिक सत्र के प्रारंभ व पंजीकरण के समय सभी छात्रों को दी जाती है।

पुरस्कार

  • अध्यक्षीय स्वर्ण पदक स्नातकोत्तर कार्यक्रम में प्रथम स्थान प्राप्तकर्ता छात्र को प्रदान किया जाता है।
  • निदेशकीय पदक स्नातकोत्तर कार्यक्रम में द्वितीय स्थान प्राप्तकर्ता छात्र को प्रदान किया जाता है।
  • पीजीपी अध्यक्षीय पदक स्नातकोत्तर कार्यक्रम में तृतीय स्थान प्राप्तकर्ता छात्र को प्रदान किया जाता है।

छात्रों को ये पदक शैक्षिक उत्कृष्टता के न्यूनतम निर्दिष्ट मानकों की पूर्ति के आधार पर प्रदान किया जाता है।

पाठ्यक्रम को प्रबंधकों के लिए गतिशील तथा जटिल वातावरण में सफलतापूर्वक संचालन हेतु आवश्यक ज्ञान व कौशल प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। यह कार्यक्रम विभिन्न स्तरों पर छात्र की समझ को तीव्र व गहन बनाता है:

संगठनात्मक व्यवस्था में संगठन का वातावरणीय संदर्भ; संगठनात्मक कार्यान्वयन की गतिशीलता; और संगठन के प्रबंधन में आवश्यक विश्लेषणात्मक उपाय तथा तकनीक प्रभावी ढंग से संगठनात्मक गतिशीलता और उसके प्रबंधकीय प्रभावों की परस्पर निर्भर प्रकृति को समझना पाठ्यक्रम का मूल है। यह छात्र को प्रबंधकीय निर्णयों को प्रभावी ढंग से लेने तथा कार्यान्वित करने के लिए आवश्यक वैचारिक और विश्लेषणात्मक क्षमताओं को प्राप्त करने में सहयोग करता है।

प्रथम वर्ष शैक्षणिक कार्य, तीन टर्म का है, इसके तहत 22 कार्यात्मक (कोर) पाठ्यक्रमों का एक अनिवार्य पैकेज है जो विभिन्न कार्यात्मक क्षेत्रों और प्रासंगिक विषयों में अवधारणाओं, उपकरणों और तकनीकों का बुनियादी ज्ञान प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है।

औद्योगिक और व्यावसायिक संगठनों में दो महीने की अनिवार्य ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम कार्य में शामिल है। ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण का उद्देश्य वास्तविक जीवन के कार्य के माहौल को समझना है। छात्रों को विशिष्ट, समयबद्ध संगठन से संबंधित असाइनमेंट पर कार्य करना आवश्यक है।

द्वितीय वर्ष के शैक्षणिक कार्य 3 टर्म में बंटे हुए हैं। व्यावहारिक प्रकृति के 15 वैकल्पिक पाठ्यक्रमों के पैकेज के साथ एकीकृत प्रकृति के दो अनिवार्य पाठ्यक्रम शामिल हैं। ये छात्रों को उनकी विशेष रुचि के क्षेत्रों में गहराई से समझ और एकाग्रता विकसित करने का अवसर प्रदान करते हैं। छात्र वैकल्पिक अध्ययन (सीआईएस) के दो पाठ्यक्रमों को वैकल्पिक या एक शोध प्रबंध परियोजना के रूप में भी ले सकते हैं, जो टर्म-5 और टर्म-6 के दो वैकल्पिक पाठ्यक्रमों के बराबर है।

संपूर्ण पाठ्यक्रमों की नियमित रूप से समीक्षा की जाती है, उद्योग की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इन्हें संशोधित, अद्यतन और संवर्धित किया जाता है, विशिष्ट विषय क्षेत्रों में नवीनतम विकास और प्रबंधन प्रथाओं पर लागू होने वाले सामाजिक और भू-राजनीतिक परिदृश्य में परिवर्तन होते हैं।

Business Environment

Economics I:

The basic objective of this course in economics is to familiarise the students with the fundamental economic principles, and to examine the ways by which these principles could profitably be employed in the context of managerial decision-making. This course deals with micro-economic issues and principles involving households and firms, mainly in the areas of Demand and Supply; Production and Cost of Firms; Price/Output Decisions by firms under varying market conditions; and factor pricing.

Economics II:

This is a course in macro-economics, with a focus on the economy as a whole in aggregative terms rather than on the micro units. The concepts of supply and demand and the equilibrium that may be established between them will, however, continue to be the underlying mechanism in analysing the economy. Starting with the National Accounts, the topics to be covered include: National Income Determination and Multiplier Analysis; Business Cycles; Inflation; Monetary and Fiscal Policies to guide the Economy etc. Attention will also be given to some of the more recent advances in areas like supply side economics and rational expectations.

Communication

Communication for Management I (*):

This skills based course introduces the student to the range of communication methods and forms in a dynamic business environment and provides the student with the opportunity to develop sound business communication skills. Topics and activities include Communication Foundations; Non-verbal Communication; Art of Listening; Effective Oral Presentations; Successful Employment Strategies -Writing and editing major types of Persuasive Prose in professional settings.

Communication for Management II (*):

This course enhances understanding and appreciation of critical issues in managerial communication and helps student master skills needed to achieve potential as executives through Role Plays, Situational Analysis, and Creative Exercises. Strategic approaches, which can be applied to a variety of business situations, are further honed in this course. The course ensures that the students are exposed to effective Business Message Writing; Report/Proposal Writing; Employment Communication; and Cross-cultural Communication. Student will, in this course, target a specific issue of Communication in a client business environment and prepare an analytical report.

Decision Sciences

Quantitative Analysis for Management I:

The package of courses under Quantitative Analysis for Management is designed to impart understanding of basic concepts, techniques and methodologies for analytical decision-making across the spectrum of managerial tasks and functions. Topics covered in this first course are: Collection, Presentation and Summarisation of Data; Probability Concepts; Basic Distributions; Correlation and Regression; Linear Programming; Transportation and assignment problems; Goal Programming.

Quantitative Analysis for Management II:

Topics covered in this course are: Methods of Sampling; Index Number and Time Series Analysis; Tests of Hypothesis (concerning one and two populations); Points and Interval Estimation; Analysis of Variance; Measures of Association; Goodness of Fit Test; Non-parametric Tests.

Quantitative Analysis for Management III (*):

Topics covered in this course are: Queuing Models and their applications; Integer Programming; Decision Analysis; Simulation.

Advanced Data Analysis (*):

The course on Advanced Data Analysis is offered with an objective that students can plan and analyse data to answer research problems. The main emphasis is on design of experiments, multiple regression analysis, multivariate data analysis and dimension reduction techniques. Use of standard softwares for the above analyses will also be demonstrated.

Finance & Accounting

Management Accounting I:

The course is designed to provide an understanding of the role and relevance of accounting function in an organisation and also the basic concepts, techniques and methodologies relevant to accounting function. Course coverage includes: Revenue recognition, Accounting for tangible and intangible assets depreciation accounting, taxation. Understanding and Analysis of Published Annual Reports; Ratio Analysis.

Management Accounting II:

The course is designed to provide an understanding of the basic elements, concepts and system of cost accounting and the use of costing information in managerial decision-making. Major topics covered are: Basic Cost Concepts; Material, Labour and Overhead Costs; Process Costing; Costing Systems; Behaviour of Costs; Marginal Costing; Standard Costing; Variance Analysis; Costing and Budgetary Control; Costing for Managerial Decisions.

Financial Management I (*):

This course is designed to enable the students to make optimal use of the financial resources of the organisation. Major topics covered in the course are: Funds Flow Analysis; Basic Concepts of Working Capital Management; Forecasting Working Capital Needs; Cash Management.

Financial Management II:

The course is designed to provide an understanding of the financial policies and issues of an organisation. The major emphasis of the course will be on financing, investment and distribution decisions. Major components of the course include: Capital Budgeting Decisions; Leverage, Capital Structure and Planning; Dividend Decisions; Leasing; Mergers and Takeovers

Human Resource Management

Behavior in Organizations: The course is designed to develop an understanding of behaviour of an individual in organisational setting.

Topics covered include:

Diagnosis and Prediction of Individual Behaviour; Group and Inter-group Behaviour, Culture and Tradition; Values and Social System; Influence of Technology; Power and Politics, Leadership and Inter-Personal Skills.

Designing Work Organizations:

The course is designed to provide an understanding of how behavioural science concepts and approaches can be applied to design effective work organisations, and the strategies used to bring about organisational change. Topics covered include: Organisational Structure, Configuration and Design; Staff-Line Role; Control Mechanisms; Power and Politics; Responsiveness; Culture; Organisational Evolution; Comparative Organisational Designs; and Organisational Change and Development.

Personnel Management and Industrial Relations:

The primary concern of the course is to develop an appreciation of effective and efficient management of human resources, and to appreciate conditions under which management/union work in harmony and conflict. The course is designed to acquaint the potential managers, irrespective of their area of subsequent specialization, with the issues and problem areas in PM/IR. The major components of the course are: Human Resource Planning; Job Analysis and Design; Recruitment and Selection; Organizational Socialization; Performance Management; Grievance Handling; Participative Management; Trade Union Policy; Unionism; Factionalism and White Collar Unionism; Labour Laws; Industrial Conflict, Conflict Resolution and Collective Bargaining; Productivity Bargaining.

Information Technology & Systems

Information Technology for Management (*):

The phenomenal growth of information technology usage in almost all types of organizations has created tremendous change in methods and procedures, in information collection and dissemination techniques, in management control processes, and in decision making activities. In fact, most of functional areas of corporate world require managers with capabilities to utilize information technology. The introductory course in Information Technology exposes students to the present day capabilities and limitations of computers. The course provides exposure and basic familiarity with the increasingly prevalent paradigm of visual programming: where a user works with a library of prefabricated objects and functions, ties them together with logic using visual techniques to produce a program to achieve the desired application results. (0.5 credit)

Management Information Systems:

The course is designed to enable the students to appreciate the role of information systems in managerial decision making; familiarise them with information systems design methodologies; to understand the hardware and software tools and technologies available for implementation of effective organisational information systems; and to appreciate the critical role of user managers in design of effective information systems.

Legal Management

Legal Aspects in Management (*):

Law and business go hand to hand. It is difficult to take any activity in business which does not have a legal consequence and every business activity to be successful must have the backing and sanction of law. With increasing globalization and governmental regulation for all business activities, the survival and growth of the organization depend to a large extent on their compliance of existing regulations individually, as well as their ability to influence public policies in the area of their concern collectively. The scope of legal studies in business is indeed vast. However, the course is designed to provide a broad understanding of legal issues which impact upon business and the legal processes involved in the management of an organization. The course will focus on general principles of laws relating to contracts and the legal aspects in business and management especially in today’s knowledge economy and the internet environment. The course will also provide an exposure to the current legal and regulatory issues in the national and international business

Marketing

Marketing Management I:

This first course on marketing management introduces the important role of marketing in the company. Major topics covered in the first course are : Analyzing the marketing environment and consumer behavior; Identifying market segments and selecting target markets; Differentiating and positioning the market offer; Developing , testing, and launching new products and services; Managing product life cycles and strategies; Managing product lines, brands and packaging and Designing pricing strategies and programs.

Marketing Management II:

This course aims at providing additional concepts in Marketing in areas related to distribution and selection of channels, modern retailing, integrated marketing communication, advertising and sales promotion. Topics covered also include Market Research, demand estimation, rural marketing, international marketing and marketing implementation.

Operations Management

Operations Management I (*):

The courses in Operations Management are designed to provide an understanding of different manufacturing and service organisations and awareness of Operations Management as a major functional area of management. Different quantitative and qualitative tools, techniques and methodologies used for analysis, design and improvement of various sub-functions involved in Production/Operations Management are dealt with. The topics covered in Operations Management I are: Operations Management and Productivity of Organisations; Operating Decision Analysis; Long Range Planning and Design for Operations; Job Design; Method Study and Work Measurement; Facilities Location and Layout. (0.5 credit)

Operations Management II:

The topics covered in this course are: Product and Process Design; Capacity Planning; Aggregate Planning; Production Scheduling and Control; Maintenance Management; Quality Management; Japanese Approach to Operations Management (JIT/TQC); Project Management; Services Management; Energy Management; Integration of Operations with Organisational Strategy.

Materials Management:

The course is designed to provide an understanding of various facets of the Materials Management function and its role in business. It also seeks to familiarise the students with quantitative and computer-based approaches in Material Planning and Control, and to create awareness of contemporary approaches in Supply Chain Management. Major topics covered are: Material Flow Systems and Supply Chain Management; Outsourcing and Purchase Requirements decisions; Management of Purchasing – Sourcing, Supplier Development/Management, International Sourcing, Pricing and Contract Management; Supply Management in JIT Systems; Materials Storage, Handling and Accounting; Materials Planning – Independent Demand Systems; Materials Planning – Dependent Demand Systems (Material Requirements Planning); Inventory Control Systems; Logistics and Physical Distribution Management; Trends in Materials Management.

ऐच्छिक

व्यापारिक वातावरण अर्थमितीय विधि:

अर्थमितीय विधि:

यह अनुशासन, अर्थमिति, आर्थिक सिद्धांत और वास्तविक जगत के बीच के इंटरफेस का प्रतिनिधित्व करता है। यह उपकरण प्रदान करता है जिससे परिकल्पना का परीक्षण करने और आर्थिक गतिविधि के पूर्वानुमान किया जा सकता है। इस विनम्र उद्देश्य के साथ प्रारंभ, इकोनोमेट्रिक्स (अर्थमिति) एक पूर्ण विषय के रूप में विकसित किया जा चुका है जो सामाजिक विज्ञान में प्रासंगिक अनुभवजन्य समस्याओं की सभी श्रेणियों से संबंधित स्थान को समाहित करता है।

इस पाठ्यक्रम में विकसित होने वाले कौशल किसी भी लागू अनुभवजन्य कार्य में महत्वपूर्ण हैं, और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में अधिकांश नौकरियों में और सार्वजनिक, निजी या शैक्षणिक क्षेत्र में या अन्य सामाजिक विज्ञानों में एक आवश्यक घटक का गठन करते हैं। इसके अतिरिक्त, अर्थमिति अनुभवजन्य अनुसंधान के लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र:

अंतरराष्ट्रीय अर्थशास्त्र में अंतरराष्ट्री व्यापार और मुक्त-अर्थव्यवस्था मैक्रोइकोनॉमिक्स के तहत दो घटक हैं। पहले भाग में व्यापार के लिए निहितार्थ प्राप्त करने के लिए एक प्रबंधन दृष्टि के साथ व्यापार के आधुनिक सिद्धांतों सहित शुद्ध अंतरराष्ट्रीय व्यापार सिद्धांत शामिल होंगे। मुक्त अर्थव्यवस्था में मैक्रोइकॉनॉमिक्स भारत के बीओपी स्थिति में सुधार के बाद भुगतान प्रणाली के संतुलन के साथ सैद्धांतिक और अनुभवजन्य मुद्दों का परीक्षण करेगा, जिनमें सुधार के बाद नीति में बदलाव और विदेशी व्यापार में रुझान, विनिमय दर तंत्र - निर्धारण और सिस्टम और मौद्रिक में विनिमय दर गतिशीलता आदि शामिल हैं तथा निर्धारित और लचीली विनिमय दर प्रणालियों के तहत एक मुक्त अर्थव्यवस्था में राजकोषीय नीति तैयार करना भी इसके अंतर्गत है। भारत और विश्व व्यापार संगठन चर्चा व्यापार और प्रतिस्पर्धा नीति को विकसित करेंगे।

औद्योगिक अर्थशास्त्र और व्यापार रणनीति:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को औद्योगिक अर्थशास्त्र की महत्वपूर्ण सैद्धांतिक अवधारणाओं से परिचित कराना है और प्रभावी आर्थिक रणनीति विकसित करने के लिए इन अवधारणाओं की प्रासंगिकता की व्याख्या करना है। औद्योगिक अर्थशास्त्र फर्मों तथा उद्योगों की आर्थिक समस्याओं और व्यवहार से संबंधित है। यह प्रसिद्ध संरचना-आचरण-प्रदर्शन प्रतिमान की जांच करता है जिसके अनुसार बाजार संरचना (बाजार में विक्रेताओं की संख्या, उत्पाद भेदभाव का स्तर, लागत संरचना, आपूर्तिकर्ताओं के साथ ऊर्ध्वाधर एकीकरण स्तर) और आचरण निर्धारित करता है (जिसमें शामिल होते हैं) मूल्य, शोध एवं विकास, निवेश, विज्ञापन एवं अन्य) और बाजार के प्रदर्शन (दक्षता, सीमांत लागत, नवाचार दर, लाभ, वितरण के मूल्य का अनुपात) का उत्पादन करता है। यह संबंध बाजार में फर्म और उद्योग के आर्थिक व्यवहार के अध्ययन के लिए बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराता है। इसमें संरचना से प्रदर्शन तक चलने वाले यूनिडायरेक्शनल की आवश्यकता नहीं है, लेकिन वापसी विधि से भी काम कर सकता है या तीन पहलुओं में से किसी भी दो के बीच अंतः संबंध प्रदर्शित कर सकता है जो- संरचना, आचरण और प्रदर्शन हो सकते हैं। पाठ्यक्रम उत्पाद भिन्नता जैसे विषयों को शामिल करेगा; विज्ञापन की रणनीति; मूल्य निर्धारण के फैसले; फर्म की वृद्धि; विविधीकरण, ऊर्ध्वाधर एकीकरण और विलय; बाजार संरचना और लाभप्रदता; शोध एवं विकास तथा नवोन्मेष आदि पाठ्यक्रम का उद्देश्य भावी प्रबंधकों को सफल व्यवसयिक निर्णय लेने में इन अवधारणाओं के ज्ञान के महत्व के बारे में परिचित करना है।

संचार

प्रभावी लेखन कौशल (ईडब्ल्यूएस):

संगठन 'सूचना' पर निर्भर करते हैं और लिखित शब्द उस सूचना को संप्रेषित करने के लिए एक शक्तिशाली माध्यम है। इस अत्यंत महत्वपूर्ण मुद्दे पर छात्रों को जागरूक करते हुए, पाठ्यक्रम उन्हें आवश्यक कौशल से लैस करेगा ताकि वे लिखित रूप में सफलतापूर्वक संवाद कब और कैसे कर सकें। वे उचित और तार्किक विधि द्वारा रचित सूचना प्रबंधन पर सार्थक दस्तावेज (रिपोर्ट, प्रस्ताव, शोध पत्र, नीति पत्र, विशेष रूप से), तैयार करने में सक्षम होंगे। ऐसे दस्तावेज (i) लक्ष्य ग्राहकों के विचारों के अनुकूल होगा; (ii) ठोस अनुसंधान, संगठन, विश्लेषण और डेटा की व्याख्या पर पूर्ण और आधारित; और (iii) सार्वभौमिक रूप से स्वीकृत मानक प्रथाओं के अनुसार, विशेष रूप से सार / संक्षेपण के साथ-साथ उद्धरण, संदर्भ और ग्रंथ सूची जैसे मानक उसमें शामिल होंगे।

उन्नत मौखिक संचार (AOC):

यह पाठ्यक्रम छात्रों को वैश्विक व्यावसायिक वातावरण के लिए आवश्यक मौखिक संचार कौशल विकसित करने और उन्हें ऊर्जा और प्रभाव के साथ ढालने में मदद करने के लिए डिजाइन किया गया है। एओसी का मुख्य उद्देश्य छात्रों को मौखिक संचार में बल, आत्मविश्वास और बोधगम्यता विकसित करने में सहयोग करना है ताकि वे भविष्य के प्रबंधक व नेतृत्वकर्ता के रूप में अपनी वास्तविक क्षमता का आंकलन कर सकें। कोर्स के प्रमुख घटक प्रभावित करने और अनुसरण, विचार मंथन तथा समूह परिसंवाद, नौकरी बाजार में प्रवेश के लिए संवाद कौशल, प्रतिक्रिया संचार, लैंगिक संवेदना संचार, सूचनात्मक तथा और अनुसरणशील प्रस्तुतियां आदि शामिल हैं।

निर्णय विज्ञान

परिवहन और दूरसंचार के लिए मात्रात्मक मॉडल: यह पाठ्यक्रम छात्रों को विभिन्न मात्रात्मक मॉडल पेश करता है जो परिवहन और दूरसंचार क्षेत्र में प्रबंधकीय समस्याओं के समाधान में उपयोगी हैं । यद्यपि परिवहन और दूरसंचार में सामान्य व्यक्ति के दृष्टिकोण से बहुत कम समानताएं होती हैं तथा इन दोनों क्षेत्रों में पेश आने वाली अनुकूलन संबंधी समस्याओं से यह चिन्हित होता है कि संबंधित अंतर्निहित गणितीय संरचनाएं और मॉडल काफी समान हैं और प्रायः उपकरण और तकनीकों के स्तर पर एकरूपता प्रदर्शित करती हैं।

इस पाठ्यक्रम में कॉम्बीनेटरिक्स, ग्राफ थ्योरी, गणितीय प्रोग्रामिंग और हेयुरेटिक्स के आधार पर विभिन्न अनुकूलन मॉडल का अध्ययन किये जाते हैं जो परिवहन और दूरसंचार क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाली अनुकूलन संबंधी समस्याओं के समाधान में सहायक होते हैं। इनमें स्पानिंग ट्री, शॉर्टेस्ट पाथ, नेटवर्क फ्लो, ट्रैवलिंग सेल्समैन प्रॉब्लम, प्लांट लोकेशन प्रॉब्लम, बिन पैकिंग प्रॉब्लम, व्हीकल राउटिंग प्रॉब्लम, ग्राफ कलरिंग, चाइनीज पोस्टमैन प्रॉब्लम, मल्टी कमोडिटी नेटवर्क डिजाइन आदि शामिल हैं।

वित्तीय लेखांकन

वाणिज्यिक बैंक प्रबंधन:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य वाणिज्यिक बैंकों के वित्तीय प्रबंधन को मजबूती प्रदान करना है। पाठ्यक्रम में शामिल विषय: बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और वाणिज्यिक बैंकिंग में समसामयिक मुद्दे, बैंक बैलेंस शीट: विश्लेषण, बैंकों की पूंजी योजना और पूंजी पर्याप्तता, देयता प्रबंधन (एनआरआई जमा सहित), धन की लागत और हस्तांतरण मूल्य, क्रेडिट प्रबंधन: बैंकों की ऋण नीति और एक्सपोज़र मानदंड, क्रेडिट प्रबंधन: क्रेडिट मूल्यांकन, क्रेडिट आवश्यकताओं का आकलन (निर्यात वित्त सहित), क्रेडिट रेटिंग और ऋणों का मूल्य निर्धारण, ऋण वितरण और लेखा की निगरानी, गारंटी प्रबंधन और अन्य शुल्क आधारित व्यवसाय, एनपीए का विवेकपूर्ण लेखा मानदंड प्रबंधन: कानूनी और गैर-कानूनी उपाय, क्रेडिट जोखिम मॉडल और क्रेडिट डेरिवेटिव, बैंकों में निवेश प्रबंधन: एसएलआर और गैर-एसएलआर प्रतिभूतियों का प्रबंधन, डीलिंग रूम संचालन और एकीकृत ट्रेजरी प्रबंधन, संपत्ति – दायित्व प्रबंधन, लिक्विडिटी जोखिम प्रबंधन, ब्याज दर जोखिम प्रबंधन, वीआर मॉडल्स एंड बैंकिंग में एप्लीकेशन इन रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम ऑफ रिस्क मैनेजमेंट सिस्टम और कैपिटल रिक्वायरमेंट का आकलन आदि हैं।

कॉर्पोरेट मूल्यांकन: सुरक्षा विश्लेषण और परामर्श संगठनों में करियर की तलाश करने वाले हमारे छात्रों की एक बड़ी संख्या के साथ, यह जरूरी है कि वे फर्मों / कॉर्पोरेट मूल्य के महत्व, यांत्रिकी, उपयोग और निहितार्थ की गहरी समझ प्राप्त करें। हालांकि मूल रूप से वित्त धारा में निहित यह पाठ्यक्रम कॉर्पोरेट रणनीति के साथ प्राकृतिक संबंध बनाने का प्रयास करेगा। पाठ्यक्रम में निम्नलिखित विषयों को शामिल किया गया है: शेयरधारक मूल्य अधिकतमकरण और कॉर्पोरेट रणनीति; मूल्यांकन के लिए रूपरेखा; नकदी प्रवाह का अनुमान; छूट दरों का अनुमान; मूल्यांकन में विशेष मामले: चक्रीय फर्मों, वित्तीय संकट में फर्म; निजी फर्म, प्रौद्योगिकी फर्म आदि; मूल्यांकन के लिए विकल्प मूल्य निर्धारण सिद्धांत का अनुप्रयोग; अधिग्रहण के फैसले के लिए मूल्यांकन का उपयोग, अमूर्त मूल्यांकन।

रणनीति और प्रतियोगिता में लागू सिद्धांत:

रणनीति का मुख्य पहलू कंपनी को बेहतर ग्राहक मूल्य प्रदान करना है, जो इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता से जुड़ा एक उपाय बन जाता है। प्रतिस्पर्धी बनने की प्रक्रिया में, कंपनियां प्रतिस्पर्धात्मक लाभ का सृजन करती हैं। प्रतिस्पर्धात्मक लाभ की अवधारणा बेहतर प्रदर्शन का पर्याय है। फर्मों के बाहरी और आंतरिक आयामों के आधार पर फर्मों के सिद्धांतों को वर्गीकृत किया जा सकता है; पर्यावरण सिद्धांत और संसाधन आधारित सिद्धांत। इन सिद्धांतों के बौद्धिक और अनुप्रयुक्त पहलुओं को समझने से विभिन्न विधियों के गुणों को चिन्हित करने में सहयोग मिलेगा, जिसके माध्यम से कंपनियां प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने के साथ उसे बनाए रखती हैं। तीव्र प्रतिस्पर्धी संसार में, वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए मजबूत सैद्धांतिक निर्माणों को अपनाने की क्षमता, जैसे जोखिमों को निर्मूल करना और अवसरों का लाभ उठाना; फर्मों द्वारा गतिशील रूप से संसाधनों और क्षमताओं का अधिग्रहण संबंधी विकास करने और लाभ उठाने की आवश्यकता होती है, जो प्रायः अवसर पैदा करती हैं। रणनीति और प्रतियोगिता में प्रयुक्ति सिद्धांत पर यह पाठ्यक्रम एक फर्म के मूल को चिन्हित करने के साथ ही प्रतियोगिता को समझने के लिए सुदृढ़ और उपयोगी रूपरेखाओं पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा जो प्रभावी रूप से सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई को पाटता है। वर्ग चर्चा के लिए चुने गए मामले संबंधित सिद्धांतों के लागू पहलुओं को प्रदर्शित करते हैं जैसे लेनदेन लागत सिद्धांत, औद्योगिक संगठन सिद्धांत, संसाधन आधारित सिद्धांत, ज्ञान आधारित फर्म सिद्धांत, गेम सिद्धांत, प्रतिबद्धता का सिद्धांत और विकल्प सिद्धांत।

कॉरपोरेट पुनर्गठन:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य बेहतर कॉर्पोरेट प्रदर्शन को प्राप्त करने के लिए छात्रों को विभिन्न रणनीतिक विधियों से अवगत कराना है। विभिन्न भारतीय कंपनियों ने केंद्रीय कॉर्पोरेट उद्देश्य के रूप में 'दीर्घकालिक शेयरधारक मूल्य को अधिकतम करना' अपनाया है। लंबी अवधि के शेयरधारक मूल्य को बढ़ाने में प्रबंधन लागत, ड्राइविंग मार्जिन, पूंजी संरचना का प्रबंधन और अधिग्रहण और विनिवेश के माध्यम से अकार्बनिक विकास शामिल है। पाठ्यक्रम में शामिल विषय हैं: एजेंसी सिद्धांत और मुक्त नकदी प्रवाह की समस्या; मूल्य श्रृंखला विश्लेषण; ऋण पुनर्गठन; शेयर पुनः खरीदना और कॉर्पोरेट प्रदर्शन;

वित्तीय यौगिक (फाइनेंसियल डेरिवेटिव्स):

वित्तीय यौगिक वे उपकरण हैं जो भारतीय वित्तीय बाजार के लिए काफी नए हैं। हालांकि, बदलते वित्तीय परिदृश्य और वित्तीय जोखिमों की प्रकृति और मात्रा में होने वाली वृद्धि के संदर्भ में, एक वित्त पेशेवर इनकी अनदेखी नहीं कर सकता है। वर्तमान समय के वित्तीय जगत में जोखिम प्रबंधन के लिए ऑप्संस, फ्यूचर, फारवर्ड्स और स्वैप जैसे उपकरणों का कार्यात्मक ज्ञान आवश्यक है। प्रकृति की समझ प्रदान करने के अलावा, यौगिक उपकरणों का व्यापार और मूल्य निर्धारण भी इन्हें स्थितियों को शामिल करने के लिए हेजिंग तंत्र हेतु एक अनुभव प्रदान करता है। इसमें प्रकृति और यौगिक बाजार; भावी और भविष्य के समझौतों का मूल्यांकन; विकल्प की कीमतों के गुण; द्विपद और ब्लैक एंड स्कोल्स दृष्टिकोण का उपयोग कर विकल्पों का मूल्यांकन; विकल्प की कीमतों की संवेदनशीलता;विकल्पों में व्यापारिक रणनीतियां; ब्याज दर दोलन; वायदा दर समझौते और ब्याज दर वायदा शामिल हैं।

परियोजना वित्त (*):

परियोजना वित्त को प्रायः गैर-संसाधन या सीमित संसाधन वित्तपोषण के रूप में संदर्भित किया जाता है, जो परंपरागत रूप से सार्वजनिक क्षेत्र की वित्त पोषित परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के वित्त को पेश करने का आधार है। बड़ी पूंजी निवेश परियोजनाओं के वित्तपोषण में उभरती प्रवृत्ति, पारंपरिक स्रोतों के बजाय ऑफ-बैलेंस शीट स्रोतों के माध्यम से वित्तपोषित है। कॉर्पोरेट्स और सरकारों ने बड़े निवेश के वित्तपोषण में परियोजना वित्त की नई अवधारणा को अपनाया है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य परियोजना वित्त के मूल, बड़ी निवेश परियोजनाओं का मूल्यांकन, परियोजना वित्त के स्रोत और परियोजना वित्त के जोखिमों के आधार पर संबंधित प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करना है। यह पाठ्यक्रम भारत में आधारभूत वित्तपोषण पर कुछ नीतिगत मुद्दों को भी शामिल करता है।

अंतर्राष्ट्रीय वित्त:

भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते उदारीकरण और वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ इसके विकसित होते संबंधों के साथ, वित्त प्रबंधकों को अंतरराष्ट्रीय आयाम और वित्तीय निहितार्थ को समझने की आवश्यकता है। इसके कवरेज में शामिल हैं: अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय प्रवाह; मुद्रा व्यापार और मध्यस्थता; समान संबंध; अंतरराष्ट्रीय क्रियाशील पूंजी प्रबंधन; विकल्प और स्वैप की समझ; अंतरराष्ट्रीय संचालन के लिए लेखांकन; विदेशी मुद्रा जोखिम की अवधारणा और प्रबंधन; विदेशी परिचालन में निवेश; अंतरराष्ट्रीय पूंजी बजट; देश / राजनीतिक जोखिम; अंतरराष्ट्रीय इक्विटी और बॉन्ड बाजार; अंतरराष्ट्रीय इक्विटी पोर्टफोलियो विविधीकरण; अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना तैयार करना; यांत्रिकी और विदेशी व्यापार और भारतीय संस्थागत और कानूनी ढांचे का वित्तपोषण।

वित्तीय सेवाओं का प्रबंधन:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारत में वित्तीय सेवाओं के क्षेत्र में नवीनतम विकास के साथ छात्रों को परिचित कराना है। पाठ्यक्रम का केन्द्र वित्तीय सेवा उद्योग के उभरते घटक और उनके प्रबंधन हैं। इसमें शामिल विषय हैं: भारत में वित्तीय सेवा उद्योग-एक अवलोकन; वित्तीय क्षेत्र में सेबी, आरबीआई की भूमिका; बीमा क्षेत्र-भूमिका, मूल्य निर्धारण, समस्याएं और मुद्दे; म्यूचुअल फंड्स; वेंचर कैपिटल और खरीदा हुआ सौदा; ग्राहक वित्त; व्यापारी बैंकिंग संगठन; क्रेडिट रेटिंग।

कराधान एवं कर योजना:

यह पाठ्यक्रम भारत में कॉर्पोरेट कराधान की समझ प्रदान करने और कर नियोजन की अवधारणाओं की प्रस्तुति के लिए विकसित किया गया है। इसमें शामिल विषय हैं: संवैधानिक प्रावधान; प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर; पूंजी बनाम राजस्व, कर गिरावट; छूट; वेतन और प्रतिभूतियों से आय; व्यवसाय से आय, मूल्यह्रास, निवेश भत्ता, पूंजीगत लाभ / हानि, सेट-ऑफ / कैरी-फॉरवर्ड, कटौती; एडवांस टैक्स, रिटर्न फाइलिंग और अपील; टैक्स प्लानिंग, टैक्स ऑडिट और दीर्घावधि राजकोषकीय योजना; कराधान पर चेलिया समिति; संपत्ति कर और उपहार कर; सीमा शुल्क अधिनियम; केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम, वैट।

मानव संसाधन प्रबंधन

भर्ती एवं चयन:

पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में भर्ती और चयन नीतियों व प्रक्रियाओं को विकसित करने और संगठनों में भर्ती तथा चयन से संबंधित कर्तव्यों को पूरा करने में सक्षम बनाने में सहयोग करना है। पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने वाले विषय हैं: मानव संसाधन योजना निर्माण और मानव संसाधन की जरूरतें; स्टाफिंग मॉडल; भर्ती और चयन संबंधी कानूनी मुद्दे; जॉब विश्लेषण; आंतरिक और बाहरी भर्ती; योग्यता मॉडलिंग और विश्लेषण; आंतरिक चयन; बाहरी चयन; चयन उपाय- जीवनी डेटा, अनुप्रयोग प्रपत्र, संदर्भ परीक्षण, मनोमीतिय परीक्षण - योग्यता परीक्षण, व्यक्तित्व परीक्षण और योग्यता परीक्षण; साक्षात्कार- साक्षात्कार के प्रकार, साक्षात्कार की तैयारी, साक्षात्कार की तकनीक; आकलन केन्द्र - आवश्यकताएं, अपेक्षाएं व कार्यान्वयन; विश्वसनीयता तथा वैधता एवं अन्य मापन।

टीम निर्माण:

आपसी निर्भरता बड़े और जटिल संगठनों की एक सामान्य विशेषता है इसलिए संगठनों की प्रभावशीलता विभिन्न स्तरों पर टीम के कार्य पर निर्भर करती है। यह पाठ्यक्रम टीम के कार्य के विभिन्न तथ्यों का पता लगाने और संगठनों में प्रभावी टीमों के विकास के लिए समझ और कौशल प्राप्त करने के लिए बनाया गया है। यह पाठ्यक्रम उन कारकों का पता लगाएगा जो टीमों की प्रभावशीलता निर्धारित करते हैं; टीम नेतृत्व की अवधारणा की समझ, टीम प्रभावशीलता के लिए आवश्यक कौशल जैसे समस्या समाधान, निर्णय, संचार और संघर्ष समाधान, सशक्तिकरण की भूमिका; आंतरिक ग्राहक अभिविन्यास पर ध्यान केंद्रित करने और टीम की प्रभावशीलता में सुधार के लिए टीम की प्रभावशीलता और रणनीतियों का निदान करने के लिए टीम के साथ अंतर-विभागीय समन्वय स्थापना।

क्षतिपूर्ति प्रबंधन (*):

उद्देश्य: संगठनों के लिए क्षतिपूर्ति एक महत्वपूर्ण रणनीतिक क्षेत्र है, जो आवेदकों को आकर्षित करने और कर्मचारियों को बनाए रखने के साथ-साथ कर्मचारियों के प्रदर्शन के इष्टतम स्तर को सुनिश्चित करने के लिए एक नियोक्ता की क्षमता को प्रभावित करता है। क्षतिपूर्ति भी एक महत्वपूर्ण आर्थिक मुद्दा है क्योंकि क्षतिपूर्ति कार्यक्रम एक संगठन के परिचालन व्यय में इसकी भाग बढ़ता जाता है। यह सेवा उद्योगों में विशेष रूप से सत्य है।

किसी संगठन की क्षतिपूर्ति प्रणाली के तीन अलग-अलग घटकों जैसे 1) आधार क्षतिपूर्ति या वेतन प्रणाली, 2) प्रोत्साहन प्रणाली और 3) अप्रत्यक्ष क्षतिपूर्ति प्रणाली, इनमें से कुछ कानूनी रूप से आवश्यक और अन्य जो नियोक्ता के विवेक पर प्रदान की जाती हैं, इत्यादि मुद्दे से पर उक्त विषय के तहत समाधान प्रस्तुत किया जाएगा।

इक्विटी के मुद्दों को चिन्हित किया जाएगा, जिसमें आंतरिक इक्विटी, बाहरी इक्विटी और व्यक्तिगत इक्विटी जैसे सभी तीन संबंधित घटक शामिल होंगे।

इस क्षेत्र के उभरते नवीनतम अंतरराष्ट्रीय रुझानों को समझाया जाएगा।

अंतर-सांस्कृतिक प्रबंधन:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य आधुनिक वैश्विक कार्यों में मानव संसाधन प्रबंधन के पारस्परिक मुद्दों का परीक्षण करना है जो आधुनिक संगठन में सांस्कृतिक भिन्नताओं के प्रबंधन पर ध्यान केंद्रित करता है। इस पाठ्यक्रम में प्रवेश के बाद छात्र संगठनात्मक स्थिति में सांस्कृतिक विविधता के बारे में छात्र से अधिक जागरूक होने की आशा करते हैं और आगे परस्पर संवेदनशीलता और परस्पर क्षमता की क्षमता

नेतृत्व विकास:

पाठ्यक्रम इस उद्देश्य से लिए डिजाइन किया गया है कि नेतृत्वकर्ता वास्तव में अपने वातावरण में अनुकूल संबंधी चुनौतियों का सामना करने के लिए क्या करते हैं। यह पाठ्यक्रम नेतृत्व को आत्म-परिवर्तन और संगठनात्मक नवीकरण की प्रक्रिया के रूप में पाता है। वर्णनात्मक और निर्देशात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए यह पाठ्यक्रम नेतृत्व और प्रबंधन के बीच अंतर स्थापित करता है। छात्रों के साझा नेतृत्व के अनुभवों पर आधारित यह पाठ्यक्रम नेतृत्व का एक मॉडल तैयार करेगा जो एक जटिल व ज्ञान संचालित वातावरण में सफल होने के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण दक्षताओं के विकास से सहयोगी है। पाठ्यक्रम के अंत में छात्रों से उन मूलभूत मूल्यों के बारे में सूचना प्राप्त करने की उम्मीद की जाती है जो किसी नेतृत्वकर्ता के व्यवहार को निर्धारित करते हैं; नेतृत्वकर्ता हेतु क्रियान्वयन विकल्प जिसे संगठनों के अनुकूलन संबंधी कार्यों में संलग्न होना है; विकास व संगठन तथा समुदाय के भीतर नेतृत्व का विस्तार। इस पाठ्यक्रम में शामिल विषय, नेतृत्व बनाम प्रबंधन जैसे पर आदान होंगे; नेतृत्व की तकनीक बनाम अनुकूलन चुनौतियां, मूल्य-आधारित नेतृत्व मॉडल, नेतृत्व विकास, ज्ञान को कार्रवाई में परिवर्तित करना, सामंजस्य, परिवर्तनकारी नेतृत्व, विकास और नेतृत्व विस्तार, भारतीय नेतृत्व से जुड़े अनुभव।

प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रबंधन:

यह पाठ्यक्रम शुरू से अंत तक प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रबंधन प्रक्रियाओं का परीक्षण करता है, जिससे छात्रों को समग्र योजना डिजाइन, उपयुक्त तरीकों, कर्मचारी और कॉर्पोरेट लक्ष्यों को एक करने, और कार्यान्वयन प्रशिक्षण के बारे में उचित निर्णय लेने संबधी सहयोग मिलता है। शिक्षण / सुविधा प्रक्रिया में व्याख्यान, प्रतिबिंबन, केस स्टडी, अभ्यास और वास्तविक जीवन अनुभव साझा करना शामिल होगा। पाठ्यक्रम में निम्नलिखित विषय शामिल हैं: प्रदर्शन मूल्यांकन तथा प्रदर्शन प्रबंधन के बीच अंतर को समझना, प्रदर्शन प्रबंधन प्रणाली का विकास और कार्यान्वयन, कंपनी के लक्ष्यों के लिए कर्मचारी लक्ष्यों और प्रदर्शन को एक करना, उद्देश्यों और प्रदर्शन मानकों को तय करना और संचार स्थापित करना, प्रदर्शन मूल्यांकन में विभिन्न मुद्दों को समझना, मूल्यांकन साक्षात्कार, प्रदर्शन प्रतिक्रिया, परामर्श व प्रशिक्षण, कार्य पर अन्य प्रणालियों के लिए प्रदर्शन प्रबंधन प्रणाली को जोड़ना।

सामरिक मानव संसाधन प्रबंधन:

संगठनों में रणनीतिक भागीदार के रूप में मानव संसाधन पेशेवरों की भूमिका की एक सैद्धांतिक और व्यावहारिक समझ विकसित करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। यह पाठ्यक्रम विभिन्न एचआर मुद्दों पर केंद्रित होगा जो विभिन्न संगठनात्मक रणनीतियों के साथ-साथ उन से निपटने के लिए उपलब्ध विकल्पों और विकल्पों पर सहयोग प्रदान करेगा।

यह पाठ्यक्रम एचआर पर एक रणनीतिक दृष्टिकोण जैसा होगा। एचआर के एक रणनीतिक दृष्टिकोण को अपनाने से बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को मानव "संपत्ति" के रूप में माना जाता है तथा संगठन और बाजार के लिए उनका मूल्य बढ़ाने हेतु इन परिसंपत्तियों में निवेश के रूप में उपयुक्त नीतियों और कार्यक्रमों को विकसित करना शामिल है।

मानव संसाधन को निवेश की दृष्टि से देखने पर, भौतिक संपत्ति को उत्पादन की परिवर्तनीय लागत की तुलना में देखा जाता है, जो किसी संगठन को अपने लोगों में सबसे अच्छा निवेश करने के विधि पर अनुमान लगाने की अनुमति प्रदान करता है। अन्य भौतिक संपत्ति जैसे कि सुविधाएं, उत्पाद और सेवाएं, प्रौद्योगिकियां, बाजार, आदि को प्रतियोगियों द्वारा आसानी से क्लोन या नकल किया जा सकता है, मानव संसाधन एकमात्र ऐसी संपत्ति है जो मूल्य में वृद्धि करता हैं, उसी समय उनकी नकल करना बहुत मुश्किल होता है। इस प्रकार से वे किसी भी कंपनी को सबसे स्थायी प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान करते हैं।

निवेश परिप्रेक्ष्य भी महत्व में बढ़ रहा है क्योंकि अधिकांश नौकरियों के लिए आवश्यक कौशल शारीरिक से ज्यादा बौधिक ज्ञान-आधारित प्रकृति होते जा रहे हैं। प्रौद्योगिकी में तीव्र और निरंतर प्रगति उन कारकों में से एक है जिन्होंने इस परिवर्तन को प्रभावित किया है।

प्रौद्योगिकी भी पूंजी के बजाय लोगों में अधिक निवेशित हो रही है क्योंकि विचारों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं के महत्वपूर्ण क्षेत्रों के साथ-साथ जटिल डेटा का विश्लेषण करने का कौशल एक संगठन द्वारा नहीं बल्कि व्यक्तिगत कर्मचारियों के "स्वामित्व" के तहत आता है। संगठनात्मक लाभ के लिए पूरी तरह से संसाधन के इस छिपे हुए संग्रह का उपयोग सबसे बड़ी चुनौती है जिसका सामना एचआर पेशेवर को करना पड़ता है।

प्रशिक्षण और विकास:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को एक प्रक्रम के रूप में प्रशिक्षण और विकास की समझ और मूल्य प्रदान करना है।

पाठ्यक्रम को 6 मॉड्यूल में पढ़ाया जाएगा।

  • क्षमता निर्माण: यह मॉड्यूल व्यक्तिगत और संगठनात्मक दोनों स्तरों पर क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • योग्यता मानचित्रण: यह मॉड्यूल छात्रों को ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण और विभिन्न स्तरों, भूमिकाओं, कार्यों, इकाइयों और व्यवसायों में योग्यता के संदर्भ में योग्यता मानचित्रण की अवधारणा से परिचित कराने का कार्य करेगा।
  • योग्यता मूल्यांकन और प्रशिक्षण के लिए विश्लेषण की आवश्यकता होती है: यह मॉड्यूल व्यक्तिगत, समूह और संगठन स्तरों पर दक्षताओं के संचालन, उनके मापन और विशिष्ट प्रशिक्षण आवश्यकताओं को चिन्हित करने पर केंद्रित होगा।
  • एक प्रशिक्षण कार्यक्रम का डिजाइन एवं संचालन: यह मॉड्यूल प्रशिक्षण कार्यक्रम को डिजाइन करने से संबंधित मुद्दों पर केन्द्रित होगा, निर्गामी, प्रेरण, मामला विधि, प्रबंधन खेल, भूमिका निर्वहन, अभिक्षमता, ग्रुप एक्टिविटी आदि जैसे विभिन्न शिक्षण, कार्यक्रम के आउटसोर्सिंग (आउटसोर्स / इंसोर्स) से जुड़ाव, संबंधित विशेषज्ञों / संस्थानों / एजेंसियों को चिन्हित करना आदि।
  • प्रशिक्षण की प्रभावशीलता का आकलन: यह मॉड्यूल प्रशिक्षण कार्यक्रम की प्रभावशीलता को मापने के लिए मापदंडों को विकसित करने पर केंद्रित होगा।
  • प्रशिक्षण प्रणाली की कार्यप्रणाली व भूमिका: यह मॉड्यूल प्रशिक्षण विभाग / कार्यप्रणाली, मानव संसाधन विभाग की भूमिका, प्रशिक्षकों को तैयार करने, आदि पर केन्द्रित होगा।

सूचना प्रौद्योगिकी एवं प्रणाली

सूचना प्रणाली विश्लेषण एवं डिजाइन: सभी व्यवसाय और संगठन सूचना प्रणाली का विकास और उपयोग करते हैं। प्रत्येक कर्मचारी आवश्यक रूप से आईएस के विकास के कुछ चरण में एक ग्राहक एक उपयोगकर्ता या उन प्रणालियों के विकासकर्ता की भूमिका निभाता है। सूचना प्रणाली विश्लेषण और डिजाइन (आईएसएडी) कंप्यूटर-आधारित अनुप्रयोगों के विकास के साथ व्यापार समस्या को हल करने में सक्षम बनाता है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रणाली विश्लेषण और डिजाइन के संदर्भ में विचारों, उपकरणों और तकनीकों को प्रस्तुत करना है।

पाठ्यक्रम सामग्री को तीन पारस्परिक रूप से सुदृढ़ करने वाले वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। पहला भाग सामान्य प्रणाली विचार और सामान्य रूप में अच्छे डिजाइन के गुणों संबंधी परिचय प्रदान करता है। दूसरे भाग में प्रणाली विश्लेषण तथा आवश्यक उपकरण से संबंधित विचार हैं। तीसरे और अंतिम भाग में संरचित प्रणाली डिजाइन के बारे में विस्तार से बताया गया है। विषय वस्तु में संरचित डिजाइन की मूल विषय-वस्तु, संरचना चार्ट जैसे डिजाइन में उपयोग किए जाने वाले उपकरण और उचित डिजाइन के गुण शामिल हैं। विश्लेषण की अपेक्षा प्रणाली डिजाइन पर ज्यादा बल दिया गया है। पाठ्यक्रम के अंत में इसका मूल उद्देश्य छात्र को सूचना प्रणाली विश्लेषण और डिजाइन के मूलभूत विचारों को अपना सके। इसके साथ ही प्रबंधन पर इसके प्रभाव तथा एक विशिष्ट प्रणाली विकास परियोजना में सामान्य उपकरणों का उपयोग करने हेतु सक्षम बनाना है।

व्यापार बुद्धिमत्ता एवं डेटा खनन:

व्यवसायिक बुद्धिमत्ता एवं डेटा संधान एक व्यावहारिक पाठ्यक्रम है जो व्यवसायिक डेटा से इंटेलिजेंस निकालने के लिए लोकप्रिय डेटा संधान विधि को प्रस्तुत किया गया है। विपणन के मामलों (तथा वित्त संबंधी कुछ मामले) का उपयोग कई डेटा खनन विधियों, उपकरणों और तकनीकों के अनुप्रयोगों को चित्रित करने के लिए किया जाएगा। इस पाठ्यक्रम में शामिल विषयों में व्यवसायिक बुद्धिमत्ता, डेटा संधान और व्यवसाय विश्लेषिकी का अवलोकन शामिल है; डाटा संधान प्रक्रिया और कार्यप्रणाली, एसएएस सेम्मा (नमूना, अन्वेषण, संशोधन, मॉडल मूल्यांकन) डाटा संधान के लिए प्रक्रिया व कार्यप्रणाली; और डेटा संधान की विधियां, उपकरण और तकनीक जैसे प्रतिगमन, निर्णय, न्यूरल (संजाल) नेटवर्क, क्लस्टरिंग, मार्केट बास्केट विश्लेषण, संगठन नियम, फजी इंफेरेन्स पद्धति, आनुवंशिक अभिकलन और रफ सेट। इनमें शामिल व्यावसायिक अनुप्रयोगों में लक्ष्य विपणन और ग्राहक संबंध प्रबंधन (विशेष रूप से बैंकिंग / वित्तीय सेवाओं / खुदरा / दूरसंचार में), वित्तीय समय श्रृंखला अनुमान, क्रेडिट जोखिम प्रबंधन और क्रेडिट स्कोरकार्ड और खुदरा बैंकिंग अनुप्रयोगों जैसे डेटाबेस विपणन अनुप्रयोग शामिल हैं। इस पाठ्यक्रम में एसएएस एंटरप्राइज माइनर व्यावहारिक संपर्क शामिल है, प्रमुख व्यवसायिक बुद्धिमत्ता एवं डेटा संधान सॉफ्टवेयर (आईआईएमएल ने एसएएस ई-माइनर के लिए एसएएस इंडिया के साथ एक शैक्षणिक गठबंधन समझौते पर हस्ताक्षर किया है)। यह पाठ्यक्रम उन छात्रों के लिए उपयुक्त है, जो डेटा के साथ कार्य करना चाहते हैं और रणनीतिक व्यवसाय के दृष्टिकोण से डेटा संधान की वैचारिक समझ में भी रुचि रखते हैं।

डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली :

डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (डीबीएमएस) एक प्रमुख प्रौद्योगिकी है जिसका उपयोग विश्व भर में डेटा प्रबंधन और प्रणाली एकीकरण के लिए किया जाता है। आरडीबीएमएस तथा विषय केन्द्रित डेटाबेस पर आधारित ग्राहक-सर्वर आर्किटेक्चर डेटा प्रबंधन के लिए नए प्रतिमान हैं क्योंकि डेटा के नए रूप कॉर्पोरेट जगत पर प्रभावी हो जाते हैं। वितरित वस्तुओं से बनाए गए अनुप्रयोग इंटरनेट के शक्तिशाली उभार द्वारा अग्रणी प्रौद्योगिकी हैं। यह पाठ्यक्रम आरडीएमएस और पावर बिल्डर के रूप में फ्रंट एंड टूल के रूप में ओरेकल 7.3.1 का उपयोग करके वितरित डेटाबेस वातावरण में एक व्यावसायिक अनुप्रयोग को डिजाइन करने संबंधी सभी इनपुट प्रदान करता है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य प्रणाली डिजाइन और कार्यान्वयन के लिए डेटाबेस प्रौद्योगिकी का गहन ज्ञान प्रदान करना है। इसमें शामिल विषय हैं: डेटाबेस प्रबंधन अवधारणाएं और आर्किटेक्चर; डेटा संगठन और डेटा मॉडल; डेटा निर्माण, पुनर्प्राप्ति तथा हस्तक्षेप के लिए एसक्यूएल क्वेरी भाषा; डेटाबेस व्यवस्थापन। इंटरनेट, वस्तु केन्द्रित डेटाबेस, दृश्य डेटाबेस और ज्ञान-आधारित डेटाबेस जैसे नेटवर्किंग वातावरण में एक डेटाबेस एप्लिकेशन को डिजाइन करने के लिए वितरित डेटाबेस की अवधारणाओं को विस्तार से कवर किया गया है।

उद्योग संसाधन परियोजना पद्धति:

उद्योग संसाधन परियोजना पद्धति (ईआरपी) छात्रों को मुख्य विचारों और मौलिक प्रौद्योगिकी से परिचित कराता है, जो एकीकृत उद्यम सूचना प्रणाली के विकास में अंतर्निहित और जिन मुद्दों पर प्रबंधकों को अंतर प्रक्रिया एकीकृत ईआरपी पद्धति के नियोजन, डिजाइन और कार्यान्वयन पर विचार करना होगा; और उद्योग प्रणाली पर व्यापक प्रबंधकीय परिप्रेक्ष्य प्रदान करना चाहते हैं। पाठ्यक्रम के विषयों में उद्योग प्रणाली का अवलोकन शामिल है; सैप, माई स्पेश, माइक्रोसॉफ्ट नेविजन और अन्य ईआरपी सॉफ्टवेयर समाधान का अवलोकन; बीपीआर, बिजनेस इंजीनियरिंग और उत्कृष्ट व्यापार प्रथा; व्यापार प्रक्रिया प्रबंधन; ईआरपी मॉड्यूल (बिक्री व विपणन, लेखा तथा वित्त, सामग्री और उत्पादन प्रबंधन) का अवलोकन; ईआरपी सिस्टम की योजना, मूल्यांकन और चयन; ईआरपी सिस्टम का डिजाइन और कार्यान्वयन; ईआरपी कार्यान्वयन उपकरण, कार्यप्रणाली और रूपरेखा; विस्तारित ईआरपी सिस्टम और ईआरपी बोल्ट-ऑन (सीआरएम, एससीएम, व्यवसाय विश्लेषिकी आदि) और ईआरपी सिस्टम संबंधी भविष्य के रुझान। पाठ्यक्रम में माइक्रोसऑफ्ट बिजनेस सॉल्यूशन- नेविजन (आईआईएमएल ने माइक्रोसऑफ्ट के साथ शैक्षणिक गठबंधन समझौते पर हस्ताक्षर किया है)पर व्यवहारिक शिक्षण शामिल है। यह पाठ्यक्रम ईआरपी सिस्टम पर काम करने में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए उपयुक्त है और एक व्यावसायिक दृष्टिकोण से ईआरपी / एंटरप्राइज सिस्टम की वैचारिक समझ में रुचि रखता है।

इंटरनेट वाणिज्य:

विशेष रूप से ऐसे समय में जब नेटवर्क कनेक्टिविटी और इंटरनेट तक पहुंच रखने वाले उपभोक्ताओं की संख्या आश्चर्यजनक रूप से बढ़ रही है, इस स्थिति में इंटरनेट कॉमर्स की भूमिका को अधिक महत्व दिया जा सकता है। पारंपरिक वाणिज्य से इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय में परिवर्तन आंतरिक और बाहरी दोनों प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार करता है, और इसलिए प्रस्तुत लाभ लगभग हर संगठन पर लागू होते हैं। वर्तमान व्यवसायों को पारंपरिक से इंटरनेट युग में परिवर्तित करने के लिए, यह न केवल यह समझना अनिवार्य हो जाता है कि इंटरनेट व्यवसाय, प्रतिरोध तथा व्यावसायिक मॉडल, बल्कि इंटरनेट में परिवर्तन को सक्षम करने के लिए आवश्यक पूर्ण रूपरेखा और प्रौद्योगिकियां क्या हैं। यह पाठ्यक्रम इलेक्ट्रॉनिक व्यवसाय के ढांचे को शामिल करता है और छात्रों को विभिन्न तकनीकों के बारे में सूचना प्रदान है। नेटवर्क, सूचना वितरण, मल्टीमीडिया प्रकाशन, सुरक्षा और भुगतान- जो इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य को सक्षम बनाते हैं।

डेटा संचार और नेटवर्किंग:

डेटा संचार एवं नेटवर्क (डीसीएन) किसी भी आधुनिक सूचना प्रणाली (आईएस) का एक अभिन्न अंग है। वर्तामान विश्व में संगठन की सफलता या विफलता केवल डीसीएन पर निर्भर है। वैश्विक इंटरनेट के लिए छोटे कार्यालयों में इंट्रानेट से शुरू, डेटा संचार और नेटवर्किंग अधिकांश व्यावसायिक समाधानों के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य व्यावहारिक और सैद्धांतिक सूचना प्रदान करना है, जो छात्रों को व्यावसायिक डेटा संचार नेटवर्क के प्रति समझ, प्रबंधन, उपयोग और सतत रखने में अधिक प्रभावी विधि से सक्षम बनाएगा। डीसीएन पाठ्यक्रम गैर-तकनीकी पृष्ठभूमि वाले छात्रों के लिए सुलभ होगा, फिर भी अधिक अनुभवी अध्येताओं को चुनौती प्रदान करने हेतु उचित विषय-वस्तु प्रदान करेगा। छात्रों को आवश्यक पृष्ठभूमि सिद्धांतों, विभिन्न प्रकार के संचार माध्यमों, लैन / मैन / वैन, इंटरनेट, मोबाइल वायरलेस संचार, फाइबर ऑप्टिक्स, ध्वनि निर्देशित बेतार संचार , डेटा, फोटो और वीडियो के बेतार संचार और संगठनों पर उनके प्रभाव से अवगत कराया जाएगा। इसके साथ ही उनका उपयोग किया जाता है और अत्याधुनिक नेटवर्किंग समाधानों पर प्रासंगिक मामला अध्ययन किया जाता है। डीसीएन पाठ्यक्रम के अंत में छात्रों को संबंधित मुद्दों से अवगत होना अपेक्षित है: (ए) पृष्ठभूमि: वर्तमान और भविष्य की तकनीक: मोबाइल इंटरनेट तक डीसीएन का विकास; गतिशीलता और वायरलेस मुद्दे; आभासी निजी नेटवर्क (वीपीएन), एमपीएलएस, वॉयस ओवर आईपी (वीओआइपी।); फ्रिड, इंटेलिजेंट नेटवर्किंग (इन); डाटा सेंटर ; सुरक्षा मुद्दे ; मानक और नेटवर्क अंतर संचालकता संबंधी मुद्दे; उभरते नेटवर्किंग रूझान। (बी) डीसीएन का व्यावसायिक प्रभाव: डीसीएन प्रौद्योगिकियों का रणनीतिक उपयोग; डीसीएन के व्यावसायिक अनुप्रयोग; व्यवसायिक प्रक्रियाओं को कुशलतापूर्वक स्वचालित और व्यवस्थित करने के लिए संगठनात्मक नेटवर्क का प्रबंधन; ई-कॉमर्स पर भार का प्रभाव। (सी) डीसीएन अनुबंधों के लिए प्रदर्शन संकेतक: नेटवर्क प्रणाली से जुड़े गुणवत्ता की सेवा संबंधी (क्यूओएस) मुद्दे; सेवा स्तर के समझौते (स्ला); नेटवर्क सिस्टम की सफलता के कारक। (डी) डीसीएन का विधान, अंकेक्षण और अनुपालन का प्रभाव: सोक्स, हिप्पा, जीएलबी आदि जैसे अधिनियमों का अनुपालन; आईटी ऑडिट: कोबिट, बीएस7799; आईटी प्रशासन; भारतीय दूरसंचार अधिनियम। (ई) डीसीएन का सामाजिक और सहयोगी प्रभाव: नेटवर्क अर्थशास्त्र; एम-वाणिज्य; ब्लॉग, विकी, समूह निर्णय समर्थन प्रणाली (जीडीएसएस)

विपणन

उन्नत विपणन शोध:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को उन्नत विपणन शोध उपकरणों से परिचित कराना है जो सामान्यतौर पर विपणन और उपभोक्ता व्यवहार शोध में उपयोग किए जाते हैं। इस पाठ्यक्रम की सामग्री में शामिल हैं: विज्ञापन बजट निर्णय (प्रतिगमन विश्लेषण); विपणन रणनीति निर्माण (विवेकाधीन विश्लेषण); प्रश्नावली विकास और विज्ञापन शीर्षक निर्णय (कारक विश्लेषण); बाजार विभाजन (समूह विश्लेषण); ब्रांड और उत्पाद रेखीय निर्णय (समूह विश्लेषण); रणनीति निर्माण ((बहुआयामी मापन)।

B2B प्रौद्योगिकी विपणन:

तकनीकी विकास और नवाचार नए व्यवसाय में वृद्धि कर रहे हैं, पुराने व्यापार पद्धति में भी परिवर्तन का कारण बन रहा है। इसके साथ ही प्रतिस्पर्धी सफलता के नियमों को पुनः परिभाषित कर रहा है। व्यवसाय से व्यवसाय (बी 2 बी) के संदर्भ में इन परिवर्तनों अपनाने के लिए, प्रौद्योगिकी और इसके विपणन से संबंधित आवश्यक अवधारणाओं की गहरी समझ आवश्यक है। इस परिप्रेक्ष्य में, बी2बी प्रौद्योगिकी विपणन शीर्षक वाला यह वैकल्पिक पाठ्यक्रम विपणन के छात्रों के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह कोर्स एक बिजनेस-टू-बिजनेस संदर्भ में प्रौद्योगिकी विपणन कंपनियों द्वारा उत्पन्न रणनीतिक मुद्दों से संबंधित है। यह दो मुद्दों पर केन्द्रित है: (1) अग्रणी कंपनियां व्यावसायिक मूल्य बनाने के लिए और प्रतिस्पर्धा में प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकी उत्पादों के प्रारंभिक प्रयोग का प्रबंधन कैसे करती हैं; (2) कैसे स्थापित कंपनियां उभरते हुए प्रौद्योगिकी उत्पाद का सामना करती हैं जो उनके प्रतिस्पर्धी लाभ को कम करने या भौतिक उत्पादों या सेवाओं की मांग को विस्थापित करने के जोखिम से भरी होता है। पाठ्यक्रम के दौरान, परिचर्चा का केन्द्र तकनीकी विकल्पों की अपेक्षा प्रबंधन होगा।

इस पाठ्यक्रम के विषयों में शामिल हैं:

बी2बी प्रौद्योगिकी विपणन, सामान्य प्रौद्योगिकी विपणन रणनीतियां, ग्राहक-कंपनी-प्रतियोगी विश्लेषण, प्रौद्योगिकी उत्पाद का पूर्वानुमान, अनुसंधान एवं विकास तथा हस्तांतरण द्वारा प्रौद्योगिकी उत्पाद अधिग्रहण पूर्वानुमान, प्रौद्योगिकी उत्पाद विपणन, प्रौद्योगिकी विपणन योजना में संवर्धन की भूमिका को एकीकृत करने की भूमिका, प्रयोगशाला से बाजार तक प्रौद्योगिकी उत्पाद लाने की प्रक्रिया और प्रौद्योगिकी व्यावसायीकरण प्रक्रिया।

उपभोगता व्यवहार:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य उपभोक्ता व्यवहार अवधारणाओं और सिद्धांतों का गहन ज्ञान प्रदान करना है, और वास्तविक जीवन उदाहरणों की मदद से इन अवधारणाओं की उपयोगिता को स्पष्ट करना है। इस पाठ्यक्रम में शामिल विषय हैं: उपभोक्ता व्यवहार के सिद्धांत; उपभोक्ता आवश्यकताएं और प्रेरणा; व्यक्तित्व और उपभोक्ता व्यवहार; उपभोक्ता धारणा; उपभोक्ता शिक्षण; उपभोक्ता दृष्टिकोण और रूझान सृजन; सूचना प्रक्रम; समूह गतिशीलता; सांस्कृतिक प्रभाव; नवोन्मेष का प्रसार; क्रय पश्चात; उपभोक्ता व्यवहार और विपणन रणनीति।

नए उत्पाद का विकास:

प्रतिस्पर्धी लाभ को बनाए रखने के लिए उत्पाद नवाचार महत्वपूर्ण है। हालांकि नए उत्पाद की सफलता दर बहुत उत्साहजनक नहीं हैं। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य नए उत्पाद नवाचारों की सफलता को बढ़ाने के लिए शोध विधि और ग्राहक आधारित निर्णय की प्रक्रिया है।

नए उत्पाद का विकास पाठ्यक्रम रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ नए उत्पाद के विकास प्रबंधन में ज्ञान और कौशल विकसित करने में प्रतिभागियों को सहयोग प्रदान करेगा। पाठ्यक्रम नए उत्पाद विकास, परीक्षण विपणन और उत्पाद जारी करने में विभिन्न निर्णय लेने की स्थितियों से छात्रों को परिचित कराने का कार्य करता है। पाठ्यक्रम का परियोजना घटक छात्रों को उपभोक्ता व्यवहार और अग्रिम विपणन अनुसंधान पाठ्यक्रम परियोजनाओं के आधार पर उत्पाद विचारों तथा अवधारणाओं के सृजन और क्षेत्र स्थिति में परीक्षण द्वारा अनुभव से सीखने का अवसर प्रदान करेगा।

प्रचार रणनीति:

प्रचार रणनीति पाठ्यक्रम, प्रचार व विज्ञापन निर्णयों और इन क्षेत्रों से संबंधित रणनीतिक मुद्दों के दोहरे पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। विज्ञापन अभियान योजना रचनात्मक रणनीति और मीडिया के मुद्दों पर बल देगी। पाठ्यक्रम विज्ञापनदाताओं द्वारा उपभोक्ता बाजारों पर अपने संदेशों के प्रेरक प्रभाव को बढ़ाने के लिए संचार के माध्यम के रूप में विज्ञापन पर ध्यान केंद्रित करेगा। इस आशय के लिए, विज्ञापन के भावार्थ का विश्लेषण किया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विज्ञापन का छात्र विज्ञापन संदेशों की गतिशीलता को समझते हैं।

मीडिया चयन और अभियान निर्धारण के लिए उनकी प्रासंगिकता हेतु मीडिया विशेषताओं पर चर्चा की जाएगी। बिक्री संवर्धन घटक उपभोक्ताओं और डीलरों, अर्थात् प्रदर्शनियों, प्रतियोगिताओं, कूपन का उपयोग, पैकेजिंग और खरीद स्थान प्रदर्शक (पॉइंट-ऑफ-परचेज डिस्प्ले) को बढ़ावा देने में उपयोग की जाने वाली प्रचार तकनीकों पर परिचर्चा करेगा।

ग्राहक संबंध प्रबंधन:

भारतीय या वैश्विक उभरते व्यापारिक तर्क ग्राहक को प्रसन्न करने के महत्व को पूर्व में कभी भी रेखांकित नहीं किया गया है। ग्राहकों के साथ निरंतर संबंध तथा अधिक लाभ के लिए उन्हें जोड़े रखना, संगठनात्मक प्राथमिकता बन गई है। इसका आधार यह है कि लाभ अर्जन तथा प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के लिए किसी फर्म को बड़ी संख्या में ग्राहकों को तलाशने की आवश्यकता नहीं है। निष्ठावान व लाभदायक ग्राहकों का एक छोटा आधार प्रतिस्पर्धी, प्रासंगिक और व्यावसायिक रूप से लाभदायक बने रहने के लिए संपूर्ण है। ऐसा करने का रणनीतिक दृष्टिकोण, ग्राहक संबंध प्रबंधन के माध्यम संभव हो पाता है। इस पाठ्यक्रम के निम्नलिखित उद्देश्य है:

  • ग्राहक संबंध प्रबंधन की समझ और वर्तमान व्यापार तर्क में इसके बढ़ते महत्व के बारे में समझ विकसित करना,
  • ग्राहक सेवा, ग्राहक आनंद, संबंध स्थापना, सूचना प्रौद्योगिकी और यादगार खरीद अनुभव के रूप में ऐसी वस्तुओं की समझ को एकीकृत करने के लिए,
  • आईटी और रिलेशनशिप बिल्डिंग के माध्यम से व्यापार के उभरते हुए रूप की समझ तथा समग्र दृष्टिकोण प्रदान करना,
  • भारत और विदेशों में विभिन्न निगमों द्वारा प्रचलित सीआरएम रणनीतियों और दृष्टिकोणों का विश्लेषण करना।
  • ब्रांड और उत्पाद प्रबंधन: प्रतिस्पर्धी बाजारों में प्रतिस्पर्धा का लाभ प्राप्त करने में ब्रांडों की भूमिका तेजी से अहम हो चुकी है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य ब्रांडों को इस संदर्भ में देखना है कि वे क्या हैं और उनका उपयोग प्रतिस्पर्धात्मक लाभ हासिल करने के लिए कैसे किया जाता है।
  • यह पाठ्यक्रम निम्नलिखित क्षेत्रों के विषय में सीखने का अवसर प्रदान करने के उद्देश्य विकसित किया गया है:
  • घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ब्रांड की समझ, ब्रांडिंग और ब्रांड इक्विटी बनाने के लिए समझ विकसित करना।
  • ब्रांड विकसित करना और विभिन्न संदर्भों में विकासशील ब्रांडों में शामिल मुद्दों को समझना।
  • विपणन रणनीति में ब्रांडों की भूमिका के बारे में समझ और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ विकसित करना।
  • ग्राहकों के साथ संबंध स्थापित करने और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करने के लिए ब्रांड प्रबंधन निर्णय संबंधित कौशल विकसित करना।

बिक्री और वितरण प्रबंधन:

पाठ्यक्रम का उद्देश्य बिक्री तथा वितरण प्रबंधन से संबंधित सिद्धांतों, अवधारणाओं, तकनीकों और प्रथाओं से छात्रों को परिचित करना है। पाठ्यक्रम का पहले भाग में विक्रय और बिक्री प्रबंधन शामिल है जिसके तीन मॉड्यूल- बिक्री कौशल, मध्य-करियर बिक्री चुनौतियां एवं उन्नत बिक्री प्रबंधन होते हैं।

दूसरा भाग में वितरण प्रबंधन शामिल है और इसमें खुदरा अग्रसिरा, चैनल मध्यस्थों और कंपनी के उद्देश्यों से संबंधित निर्णयों से निपटने वाले तीन मॉड्यूल शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम उन प्रतिभागियों के लिए लक्षित है जो विपणन में अपना करियर बनाने की इच्छा रखते हैं, हालांकि यह वित्त व प्रणालियों में करियर पर विचार करने वालों के लिए भी बहुत उपयोगी होगा। ग्राहक संबंध प्रबंधन।

सेवा विपणन:

सेवा व्यवसायों के प्रबंधन में सुधार हेतु रुचि में वृद्धि जारी है। परिणामस्वरूप सेवा प्रबंधन पर न केवल विपणन में, बल्कि मानव संसाधन और संचालन जैसे विपणन संबंधी कार्यों में भी ज्ञान का बड़ा भंडार उपलब्ध है। विश्व की अर्थव्यवस्थाओं पर सेवा क्षेत्र का मजबूत प्रभाव है। इसके अतिरिक्त विनिर्माण कंपनियां कुछ स्थायी प्रतिस्पर्धी लाभों में से एक के रूप में सेवा क्षेत्र की क्षमता को पहचानती हैं जिनको विकसित किया जा सकता है। पाठ्यक्रम ग्राहकों पर केंद्रित है जो ग्राहकों की आवश्यकताओं को सुनता है, ग्राहकों द्वारा परिभाषित सेवा मानदंड विकास, रणनीति और सेवा डिजाइन को संरेखित करता है, सेवा प्रदान करने के साथ ही सेवा संबंधी वादों का प्रबंधन भी करता है। पाठ्यक्रम में शामिल व्यापक विषय हैं: सेवा संबंधी चुनौती; सेवा की समझ; डिजाइनिंग और वितरण सेवाएं; प्रबंधन क्षमता और प्रबंधन मांग; सेवा संबंधी गुणवत्ता की खोज; ग्राहक सेवा; सेवा प्रबंध में मानवीय आयाम; संगठन और एकीकरण।

खुदरा बिक्री प्रबंधन:

पड़ोस की किराने की दुकानों से लेकर वर्तमान में मॉल और मल्टीप्लेक्स की स्थिति, भारत में खुदरा बिक्री बड़े परिवर्तन से होकर गुजरी है। अर्थव्यवस्था के उदारीकरण ने इस उद्योग के विकास को एक उचित बल प्रदान किया है। नए प्रारूप, श्रेणियां और हितधारक तेजी से उभर रहे हैं। किसी भी खुदरा क्षेत्र के पेशेवर को एक बहुमुखी भूमिका निभानी होती है: फैशन विशेषज्ञ, आईटी प्रबंधक, वित्तीय विश्लेषक, अच्छे मानव संसाधन प्रबंधक और एक सक्षम विपणन कर्ता होने के अलावा एक रियल एस्टेट प्रबंधक की भी भूमिका निभानी होती है। अन्य व्यवसाय में केवल खुदरा बिक्री ही अवसरों और चुनौतियों की एक विस्तृत श्रृंखला प्रदान करता है। इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को व्यवसाय प्रबंधन अनुशासन के रूप में बिक्री क्षेत्र को समझने के लिए कौशल, रचनात्मकता और ज्ञान प्रदान करना है।

संचालन प्रबंधन

प्रणाली कार्यशीलता के प्रबंधकीय अनुप्रयोग:

यह पाठ्यक्रम प्रणाली कार्यशीलता (एसडी) के सिद्धांत और प्रविधि संबंधी सूचना प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है; एसडी मॉडल निर्माण के साथ छात्रों को परिचित करना और उन्हें विनिर्माण, विपणन और वितरण, अनुसंधान और विकास, प्रबंधन नियंत्रण और वित्त तथा सामाजिक प्रणालियों जैसे एसडी के अनुप्रयोग क्षेत्रों से परिचित कराना। इस पाठ्यक्रम में आधारभूत एसडी से जुड़े सिद्धांत शामिल हैं; एसडी के लिए विश्लेषणात्मक समीकरण; सामान्य लूप आरेख; तालिका प्रक्रिया; प्रवाह आरेख और डायनामो; विलंबन; घातांकीय मृदुकरण; ध्वनि प्रतिक्रिया; मॉडल सत्यापन; एसडी के माध्यम से पूर्वानुमान; एसडी अनुप्रयोग क्षेत्र; प्रारूप सृजन अभ्यास और कंप्यूटर प्रेरण।

विनिर्माण प्रणाली प्रारूप:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य समकालीन निर्माण प्रणालियों से संबंधित मुद्दों के साथ छात्रों को परिचित करना है और उन्हें विभिन्न प्रकार के निर्माण प्रणालियों के विश्लेषण और डिजाइन में उपयोग किए जाने वाले उपकरणों, तकनीकों और प्रौद्योगिकियों से परिचित करना है। पाठ्यक्रम की सामग्री में शामिल है: विनिर्माण रणनीति के आधार पर विनिर्माण प्रणाली के प्रकार, सुविधाएं और प्रयोज्यता; फैक्टरी भौतिकी अवधारणाएं; फ्लो लाइन और असेंबली प्रणाली; समूह प्रौद्योगिकी और दूरसंचार विनिर्माण; लचीला विनिर्माण; उत्तरदायी विनिर्माण - बड़े पैमाने पर अनुकूलन, समय आधारित विनिर्माण और समयबद्ध विनिर्माण; कंप्यूटर एकीकृत उत्पादन; सामग्री प्रवाह प्रणाली, सुविधाएं योजना और सामग्री नियंत्रण; मूल्यांकन, चयन और कार्यान्वयन विनिर्माण प्रणाली, और विनिर्माण प्रणाली " क्लासिक्स (आदर्श)"।

आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन:

हाल के वर्षों में यह पाया गया है कि आपूर्ति श्रृंखलाओं के प्रभावी नियोजन और प्रबंधन द्वारा पर्याप्त बाजार लाभ और लागत बचत प्राप्त की जा सकती है। यह पाठ्यक्रम एकीकृत प्रणालियों के रूप में आपूर्ति श्रृंखलाओं के डिजाइन, संचालन, नियंत्रण और प्रबंधन में प्रमुख अवधारणाओं और समाधान प्रदान करना चाहता है। इस कार्यक्रम के पहले वर्ष में कार्यात्मक मुद्दे शामिल है, और इसके साथ ही पूरे चेन के माध्य अंतर-कार्यात्मक एवं परिचालन साझेदारी पर अनुभव प्रदान करना शामिल है। इस पाठ्यक्रम में शामिल है: आपूर्ति प्रबंधन सिद्धांत एवं प्रारूप विकास तथा उपयोगिता; आपूर्ति श्रृंखला रणनीति चयन एवं खाका; संसाधन प्राप्ति प्रबंधन एवं आपूर्तिकर्ता प्रबंधन; आपूर्ति श्रृंखला में सूची प्रबंधन; आपूर्ति श्रृंखला में गतिशीलता; आपूर्ति श्रृंखला एकीकरण एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिवर्तन; ग्राहक मूल्य एवं केन्द्रियता; वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन; और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में नवाचार और सर्वोत्तम प्रथाओं के अभ्यास।

विनिर्माण योजना और नियंत्रण:

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विनिर्माण संचालन के प्रबंधन में योजना और नियंत्रण के मुद्दों से संबंधित उन्नत अवधारणाओं संबंधी ज्ञान छात्रों को प्रदान करना है। यह उत्पादन और सूची प्रबंधन में समकालीन रुचि के मुद्दों के साथ छात्रों को परिचित कराना है। कवर किए गए विषय हैं: विनिर्माण योजना और नियंत्रण रूपरेखा विशेष रूप से एमआरपी- II; क्षमता योजना तकनीक; सामरिक उत्पादन योजना में उन्नत अवधारणाएं; उत्पादन-सूची प्रबंधन और बैच उत्पादन प्रणाली; वितरण सूची प्रणाली; संचालन समयबद्धता और नियंत्रण; ऑप्ट / ड्रम बफर रोप / बाधा पहुंच का सिद्धांत; जेआईटी सिस्टम में विनिर्माण योजना और नियंत्रण और उच्च पुनरावृत्ति प्रणाली जैसे विशिष्ट परिदृश्यों में नियंत्रण; प्रवाह पंक्ति, सेलुलर विनिर्माण, जॉब शॉप्स, और परियोजनाएं; एकीकृत और कंप्यूटर आधारित एमपीसी प्रणाली; उत्पादन और संचालन प्रबंधन में वर्तमान विषय-वस्तु और एकीकृत मुद्दे।

परियोजना प्रबंधन:

पाठ्यक्रम को विभिन्न प्रकार की परियोजनाओं की समझ और परियोजना प्रबंधन के लिए कुल दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है; परियोजना विफलताओं के कारणों को समझने के लिए; और कंप्यूटर सहित परियोजना प्रबंधन उपकरण और तकनीकों में हाल के अग्रिमों के साथ छात्रों को परिचित करना। इस पाठ्यक्रम में शामिल विषय हैं; परियोजना प्रबंधन सिद्धांत; परियोजना और लक्ष्यों की स्थापना; मानव संसाधन और अनुबंध का प्रबंधन; कार्यान्वयन के लिए प्रणाली और प्रक्रिया का प्रबंधन; परियोजना दिशा, समन्वय और नियंत्रण; परियोजना प्रबंधन प्रदर्शन; परियोजना प्रबंधन मामला अध्ययन; परियोजना सूचना प्रणाली; कंप्यूटर आधारित परियोजना प्रबंधन;परियोजना प्रबंधन का भविष्य।

संचालन रणनीति:

परिचालन प्रक्रिया, समकालीन व्यावसायिक वातावरण में महत्वपूर्ण प्रतिस्पर्धी लाभ प्रदान कर सकती है। यह पाठ्यक्रम एकीकृत शैली में डिजाइन और संचालन प्रबंधन में विभिन्न रणनीतिक पहलुओं संबंधी परिचय प्रदान करता है। इस पाठ्यक्रम का शिक्षण उद्देश्य संचालन के विभिन्न निर्णय क्षेत्रों तथा संचालन और अन्य क्षेत्रों के बीबीच संबंध स्थापित करना; उद्देश्यों के अनुरूप संचालन नीतियों को बनाने और लागू करने की प्रक्रिया चिन्हित करना; और संचालन में क्षमता निर्माण के महत्व और विधियों को समझना। पाठ्यक्रम की व्यापक सामग्री हैं: संचालन रणनीति की अवधारणा; क्षमता और सुविधाएं रणनीति; उत्पाद / प्रक्रिया विकास और प्रौद्योगिकी रणनीतियां; विनिर्माण संगठन और कार्यबल मुद्दे; सेवा संचालन रणनीति; संचालन क्षमता निर्माण और प्रबंध सुधार रणनीतियां; और संचालन के माध्यम से प्रतिस्पर्धा।

रणनीतिक प्रबंधन

रणनीतिक नवाचारों का प्रबंधन:

रणनीतिक नवाचारों का प्रबंधन (एमएसआई) का प्रबंध एक अंतर-विषय पाठ्यक्रम है जो रणनीति, संगठन, प्रौद्योगिकी और विपणन के विभिन्न प्रबंधकीय क्षेत्रों का विश्लेषण करता है और वैश्विक संदर्भ में नवाचार प्रक्रिया के साथ एकीकृत किया जाता है। जबकि यह पाठ्यक्रम मुख्य रूप से नए उत्पाद विकास, विपणन, और ज्ञान प्रबंधन के संदर्भों से उदाहरण प्रस्तुत करता है, और इस प्रकार से विकसित अंतर्दृष्टि सभी विषयों और नियमित नवाचार और परिवर्तन की समस्या का सामना करने वाले संगठनों पर लागू होती हैं।

यह पाठ्यक्रम स्थापित फर्मों में नवाचार के रणनीतिक प्रबंधन (अपेक्षाकृत उद्यमशीलता के नए उपक्रम) पर केंद्रित है। पाठ्यक्रम की वैचारिक रूपरेखा नवाचार पर एक विकासवादी प्रक्रिया के परिप्रेक्ष्य पर आधारित है। इस विकासवादी परिप्रेक्ष्य से जुड़े मौलिक विचार हैं 1) एक फर्म की नवाचार रणनीति अपनी आंतरिक (तकनीकी और संगठनात्मक) क्षमताओं से उभरती है, 2) नवाचार को रणनीति बाहरी (पर्यावरण) और आंतरिक (संगठनात्मक) बलों द्वारा गति प्रदान किया जा सकता है, और 3) नवाचार रणनीति का निर्माण, उस अनुभव के माध्यम से उत्पन्न होता है, जो फर्म की नवाचार दक्षताओं और क्षमताओं को और विकसित करने का कार्य में योगदान प्रदान करती है।

रणनीति और प्रतियोगिता में लागू सिद्धांत:

रणनीति का मुख्य पहलू कंपनी को बेहतर ग्राहक मूल्य प्रदान करना है, जो इसकी प्रतिस्पर्धात्मकता का उपाय बन जाता है। प्रतिस्पर्धी बनने की प्रक्रिया में, कंपनियां प्रतिस्पर्धात्मक लाभ पैदा करती हैं। प्रतिस्पर्धात्मक लाभ की अवधारणा बेहतर प्रदर्शन का पर्याय है। फर्मों के बाहरी और आंतरिक आयामों के आधार पर फर्मों के सिद्धांतों को वर्गीकृत किया जा सकता है; पर्यावरण सिद्धांत और संसाधन आधारित सिद्धांत। इन सिद्धांतों के बौद्धिक और व्यावहारिक पहलुओं को समझने से विभिन्न विधियों को अपनाने में मदद मिलेगी, जिसके माध्यम से कंपनियां प्रतिस्पर्धात्मक लाभ प्राप्त करती हैं और बनाए रखती हैं। तीव्र प्रतिस्पर्धी जगत में, वास्तविक दुनिया की समस्याओं के लिए मजबूत सैद्धांतिक निर्माणों को लागू करने की क्षमता, जैसे कि खतरों को निर्मूल किया जाता है और अवसरों का लाभ उठाया जाता है; फर्मों को गतिशील रूप से संसाधनों और क्षमताओं का अधिग्रहण से जुड़े विकास करने और लाभ उठाने की आवश्यकता होती है, जो प्रायः अवसर पैदा करते हैं। रणनीति और प्रतियोगिता में व्यावहारिक सिद्धांत के बारे में यह पाठ्यक्रम किसी फर्म की नींव से परिचय कराता है और प्रतियोगिता को समझने के लिए सुदृढ़ और उपयोगी रूपरेखाओं पर चर्चा करने के लिए एक मंच प्रदान करेगा जो प्रभावी रूप से सिद्धांत और व्यवहार के बीच की खाई को पाटता है। वर्ग चर्चा के लिए चुने गए मामले संबंधित सिद्धांतों के लागू पहलुओं को प्रदर्शित करते हैं और जैसे लेनदेन लागत सिद्धांत, औद्योगिक संगठन सिद्धांत, संसाधन आधारित सिद्धांत, ज्ञान आधारित फर्म सिद्धांत, गेम सिद्धांत, प्रतिबद्धता का सिद्धांत और विकल्प सिद्धांत।

कॉर्पोरेट प्रशासन और रणनीति (*):

हमारा यह दृढ़ विश्वास है कि कॉर्पोरेट प्रशासन से संबंधित मुद्दों की गहरी समझ और सराहना अब सभी प्रबंधकों के लिए आवश्यक है। यह मूलभूत पाठ्यक्रम छात्रों को कॉर्पोरेट नेतृत्व और रणनीतिक निर्णयों, सामाजिक उत्तरादायित्व और बाजार पूंजीकरण और ज्ञान-संचालित वैश्विक अर्थव्यवस्था में नियामक अनुपालन के बुनियादी मुद्दों के महत्व के प्रति संवेदनशील बनाने के लिए बनाया गया है। छात्रों को निदेशक मंडल से संबंधित अवधारणाओं, नैतिक दुविधाओं तथा विकल्पों, विश्वसनीयता प्रबंधन, शेयरधारक मूल्य बनाम हितधारक मूल्य, आन्तरिक व्यवसाय तथा स्वामित्व में नैतिक मुद्दे, कॉर्पोरेट दृष्टि और रणनीतिक दिशा निर्धारित, शीर्ष-प्रबंधन मूल्यांकन तथा क्षतिपूर्ति आदि से अवगत कराया जाता है। सीजी एंड एस एक एकीकृत पाठ्यक्रम है और छात्रों को कानून, अर्थशास्त्र, वित्त, ओबी, नैतिकता और मनोविज्ञान के विषयों पर विभिन्न दृष्टिकोणों को कक्षा में शामिल करने हेतु प्रोत्साहित किया जाएगा। पाठ्यक्रम छात्रों को अपने कार्यकारी करियर में रणनीतिक और नैतिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए तैयार करना चाहता है।

वैश्विक प्रतिस्पर्धा प्रबंधन:

अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रबंधन में यह उन्नत पाठ्यक्रम, वैश्विक निगमों के लिए उपयुक्त वैश्विक रणनीति बनाने, संगठित नवाचार करने, प्रतिभा और ज्ञान को बनाए रखने के लिए पहल और उपयुक्त संरचनाओं और प्रणालियों को डिजाइन विधि के बारे में सूचना प्रदान करता है। हम नई अर्थव्यवस्था वाली कंपनियों पर यह समझने के लिए समय व्यतीत करते हैं कि इस तरह के व्यवसाय विभिन्न अन्य अवधियों में उद्योग को कैसे बदलते हैं और पिछले एक वर्ष या उससे अधिक के दौरान सीखे गए विभिन्न प्रबंधन सिद्धांतों, उपकरणों और तकनीकों को एकीकृत करने की उनकी क्षमता को बढ़ाते हैं।

पाठ्यक्रम की संरचना:

हम प्रतिमान बदलाव पर चर्चा करते हैं और उभरते वैश्विक व्यापार समूचे पर्यावरण और वैश्विक उद्योग संरचनाओं का अध्ययन करते हैं। हम वैश्विक संदर्भों में सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा करने के लिए आवश्यक फर्म-स्तरीय रणनीतिक प्रतियोगिताओं, संसाधनों और संरचनाओं के बारे में विस्तार से सूचना प्रदान करते हैं। हम केवल गुणवत्ता बढ़ाने और लागत को कम करने की शर्त पर वैश्विक प्रतिस्पर्धा से निपटने के पारंपरिक सोच से भिन्न हैं - वास्तव में, इन फर्म-स्तरीय विशेषताओं को देखते हुए व्यवहार किया जाता है।

विलय और अधिग्रहण:

विश्व भर की बाजार अर्थव्यवस्थाओं के औद्योगिक मानचित्रों को विलय, अधिग्रहण, विभाजन, और कॉर्पोरेट पुनर्गठन के अन्य रूपों के माध्यम से पिछले कुछ वर्षों में लगातार व पुनः तैयार किया गया है। वैश्वीकरण और अंतर्राष्ट्रीयकरण का दबाव, यूरोपीय संघ, नाफ्टा, परिपक्व बाजार, और तीव्र प्रतिस्पर्धा जैसी आर्थिक संघों के उभार द्वारा विश्व में एम एवं ए गतिविधि के लिए एक नया उत्साह जगा है। भारतीय उद्योग का वैश्विक प्रतिस्पर्धा में प्रवेश के बाद से ही हम कॉरपोरेट पुनर्गठन और नवीकरण के लिए विलय, अधिग्रहण और रणनीतिक गठजोड़ इत्यादि देख रहे हैं। देश में एफईआरए, एमआरटीपी अधिनियम और बड़े पैमाने पर एफडीआई जैसे नीतिगत नियमों में आसानी ने भी भारतीय उद्योग में एम एंड ए गतिविधि को बढ़ावा दिया है।

उपरोक्त सभी विषय व संदर्भों को इस पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम संरचना के आधार पर बहुआयामी है जो विलय और अधिग्रहण के रणनीतिक, वित्तीय, मानवीय और कानूनी पहलुओं पर सूचना उपलब्ध कराता है। पाठ्यक्रम औद्योगिक संरचना पर विलय और अधिग्रहण के वृहद आर्थिक प्रभावों से निपटने से बचना होगा, बल्कि फर्म स्तर के मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।

अनिवार्य

रणनीतिक प्रबंधन

पाठ्यक्रम का उद्देश्य भारतीय अर्थव्यवस्था में समग्र व्यावसायिक वातावरण के प्रति छात्रों को संवेदनशील बनाना है, जिसके भीतर एक संगठन को कार्य करना है। पाठ्यक्रम में देश की सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक प्रणालियों पर सामग्री एकीकृत प्रकृति की है। पाठ्यक्रम व्यक्तिगत प्रबंधकों द्वारा निर्णय में इन पहलुओं के निहितार्थ पर भी बल देता है। वैश्वीकरण की ओर बढ़ते रुझान की दृष्टि से उभरते हुए व्यापारिक परिदृश्य पर चर्चा करते हुए भू-राजनीतिक विचारों पर विशेष बल दिया जाता है।

रणनीतिक प्रबंधन

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को रणनीतिक प्रबंधन की अवधारणा से परिचित कराना है, उनमें कॉर्पोरेट परिप्रेक्ष्य विकसित करना है, उन्हें विभिन्न संगठनों में जटिल अंतर-कार्यात्मक समस्याओं / मुद्दों को चिन्हित करने और उनसे निपटने के लिए एकीकृत कौशल प्रदान करना है और इस उद्देश्य के लिए उपलब्ध वैचारिक तथा विश्लेषणात्मक रूपरेखा प्रदान करना भी है।यह पाठ्यक्रम दो भागों में विस्तृत है, रणनीति निर्माण तथा कार्यान्वयन के मुद्दों को शामिल किया गया है। पहले भाग क्रमशः केंद्रित है: कॉर्पोरेट रणनीति की अवधारणा; रणनीति निर्माण में महाप्रबंधक की भूमिका; संगठनात्मक मिशन, उद्देश्य और रणनीतियां; वातवरण का विश्लेषण; आंतरिक मूल्यांकन; व्यक्तिगत मूल्य; व्यवसाय की सामाजिक जिम्मेदारी; रणनीतिक विकल्प; और रणनीतिक विकल्प। पाठ्यक्रम के दूसरे भाग में शामिल हैं: संसाधन आवंटन; संगठन संरचना, प्रणाली, कौशल, कार्यात्मक नीतियां; और नेतृत्व की शैलियां। (1.5 क्रेडिट)

पीजीपी-II (2013-14)

क्षेत्र टर्म IV टर्म V टर्म VI
विपणन
  1. व्यवसाय से व्यवसाय विपणन
  2. उपभोक्ता व्यवहार उन्नत विपणन शोध
  3. प्रचार की रणनीति
  4. बिक्री एवं वितरण प्रबंधन
  1. बिक्री एवं वितरण प्रबंधन
  2. उपभोगता व्यवहार
  3. खुदरा प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय विपणन
  4. उत्पाद प्रबंधन
  5. सामरिक विपणन सेवाएं विपणन
  1. ग्राहक संबंध प्रबंधन
  2. ब्रांड प्रबंधन
  3. व्यवहारिक रणनीति विपणन
वित्त एवं लेख
  1. कॉर्पोरेट मूल्यांकन एवं पुनर्गठन
  2. वित्त में मात्रात्मक अनुप्रयोग
  3. निवेश प्रबंधन  
  4. वित्तीय विवरण विश्लेषण
  5. वित्तीय डेरिवेटिव एवं जोखिम प्रबंधन
  6. कॉर्पोरेट मूल्यांकन एवं पुनर्गठन
  1. तय आमदनी बाजार
  2. वित्तीय संस्थानों का प्रबंधन
  3. निवेश विश्लेषण एवं पोर्टफोलियो प्रबंधन  
  4. परियोजना वित्त
  5. कॉर्पोरेट कर योजना एवं प्रबंधन
  6. निजी इक्विटी
  7. अंतरराष्ट्रीय वित्त
  1. निवेश बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं
  2. अंतरराष्ट्रीय वित्त
  3. उन्नत वित्तीय लेखा
रणनीतिक प्रबंधन 1) रणनीतिक गठबंधन
2) रणनीति एवं स्पर्धा में व्यवहारिक सिद्धांत
1) विविधता एवं परिवर्तन प्रबंधन
2) रणनीतिक उद्यमिता
3) रणनीतिक नेतृत्व एवं प्रशासन
1) प्रौद्योगिकी व नवाचारों का रणनीतिक प्रबंधन
2) विलय एवं अधिग्रहण
मानव संसाधन प्रबंधन
  1. टीम संगठन
  2. रचनात्मकता एवं नवाचार प्रबंधन
  3. रणनीतिक व्यापार वार्ता
  4. भर्ती एवं चयन
  1. प्रदर्शन मूल्यांकन और प्रबंधन
  2. अंतर-संस्कृति प्रबंधन
  3. प्रभावी नेतृत्व के लिए कोचिंग और सलाह  
  1. नेतृत्व खोज
  2. प्रशिक्षण एवं विकास
संचालन प्रबंधन 1) विनिर्माण प्रणाली डिजाइन
2) रसद और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन
3) सेवा संचालन प्रबंधन
1)   विनिर्माण योजना और  नियंत्रण 
2)   परियोजना प्रबंधन  
3) नवाचार और नए उत्पाद विकास में निर्णय  
1) संचालन रणनीति
आईटी एवं प्रणाल 1) व्यवसाय बुद्धिमत्ता एवं डाटा संधान
2) व्यवसाय डेटा   संचार
3) सॉफ्टवेयर उत्पादों और सेवाओं का व्यवसाय प्रबंधन
1) व्यवसाय विश्लेषिकी एवं और डेटा भंडारण
2) व्यवसाय प्रक्रिया प्रबंधन प्रणाली
1)    आईटी जोखिम प्रबंधन 
2)   स्प्रेडशीट प्रारूपण  
3)   विशाल डेटा विश्लेषिक
व्यापारिक वातावरण
  1. अर्थमितीय विधियां
1) वैश्विक राजनीतिक अर्थव्यवस्था
2) उभरते बाजार: परिवर्तन में राष्ट्र
3) आर्थिक नीति विश्लेषण  
4) व्यवसाय पूर्वानुमा
1) औद्योगिक अर्थशास्त्र एवं व्यापार रणनीति
2) विकास एवं विकास का अर्थशास्त्र
संचार 1) साहित्य के माध्यम से नेतृत्व  
2) उन्नत मौखिक संचार
1) सीमाहीन संचार
निर्णय विज्ञान 1) गेम थ्योरी एवं अनुप्रयोग 1) वित्त हेतु अनुकूलन विधि
सामान्य प्रबंधन 1) व्यावसायिक स्थिरता एवं वाह्य बाजार
1)   उद्यमिता एवं नवाचार
2) समकालीन फिल्म उद्योग
1) न्याय, नीतिशास्त्र एवं नैतिकता

टर्म VI कार्यशाला की विकल्प सूची। छात्र अधिकतम 2 कार्यशालाओं के लिए पंजीकरण कर सकते हैं:

  • खेल विपणन - विपणन क्षेत्र
  • गुणात्मक बाजार अनुसंधान – विपणन क्षेत्र
  • अन्वेषण के माध्यम से पहचान और भूमिका तैयारी –एचआर क्षेत्र
  • मनोरंजन व्यवसाय - सामान्य प्रबंधन
  • कैपस्टोन व्यवसाय प्रेरण - सामान्य प्रबंधन
  • जोखिम प्रबंधन - वित्त क्षेत्र
  • व्यक्तिगत वित्त एवं खुदरा बैंकिंग - वित्त क्षेत्र
  • व्यवहार वित्त - वित्त क्षेत्र
वार्षिक कैलेंडर 2018-19
पीजीपी-II पंजीकरण जून 11, 2018 (सोमवार)

टर्म-IV

कक्षाएं प्रारंभ

मिड-टर्म परीक्षा

इंड-टर्म परीक्षा

टर्म ब्रेक

पीजीपी-एबीएम के लिए क्षेत्र कार्य

जून 12, 2018

जुलाई 18-22, 2018

अगस्त 28-सितंबर 02, 2018

सितंबर 03-09, 2018

सितंबर 04-09, 2018

(मंगल)

(बुधवार-रविवार)

(मंगल-रविवार)

(सोमवार-रविवार)

(मंगलवार-रविवार)

टर्म-V

पंजीकरण / कक्षाएं प्रारंभ

मिड-टर्म परीक्षा

इंड-टर्म परीक्षा

टर्म ब्रेक

सितंबर 10, 2018

अक्टूबर 29-नवंबर 02, 2018

दिसंबर 15-20, 2018

दिसंबर 21-26, 2018

(सोमवार)
(सोमवार-शुक्रवार)
(शनिवार-वृहस्पतिवार)
(शुक्रवार-बुधवार)

टर्म-VI

पंजीकरण / कक्षाएं प्रारंभ

मिड-टर्म परीक्षा

दीक्षांत समारोह

दिसंबर 27, 2018

फरवरी 21-26, 2019

मार्च 16, 2019

(बुधवार)

(बुधवार- मंगलवार)

(शनिवार)

पीजीपी-I

गणित में प्रारंभिक पाठ्यक्रम

परीक्षा- प्रारंभिक पाठ्यक्रम

प्रवेषण मापांक

जून 11-22, 2018

जून 23, 2018

जून 24-25, 2018

(सोमवार-शुक्रवार)

(शनिवार)

(रविवार-सोमवार)

टर्म-I

पंजीकरण

कक्षाएं प्रारंभ

मिड-टर्म परीक्षा

इंड-टर्म परीक्षा

टर्म ब्रेक

जून 26-27, 2018

जून 28, 2018

अगस्त 02-05, 2018

सितंबर 09-13, 2018

सितंबर 14-19, 2018

(मंगलवार-बुधवार)

(वृहस्पतिवार)

(वृहस्पतिवार-रविवार)

(रविवार-वृहस्पतिवार)

(शुक्रवार-वृहस्पति)

टर्म-II

पंजीकरण

कक्षाएं प्रारंभ

मिड-टर्म परीक्षा

टर्म इंड परीक्षा

टर्म ब्रेक

सितंबर 20, 2018

सितंबर 20, 2018

नवंबर 05-08, 2018

दिसंबर 22-27, 2018

दिसंबर 28, 2018- जनवरी 03, 2019

(वृहस्पति)

(वृहस्पति)

(सोमवार- वृहस्पति)

(शनिवार- वृहस्पति)

(शुक्रवार- वृहस्पति)

टर्म-III

पंजीकरण

कक्षाएं प्रारंभ

मिड-टर्म परीक्षा

दीक्षांत समारोह

इंड-टर्म परीक्षा

जनवरी 04, 2019

जनवरी 04, 2019

फरवरी 18-20, 2019

मार्च 16, 2019

मार्च 27-31, 2019

(शुक्रवार)

(शुक्रवार)

(सोमवार-बुधवार)

(शनिवार)

(बुधवार-रविवार)

पूर्व छात्र सम्मेलन:

ग्रीष्मकालीन प्लेसमेंट:

निवेश:

मैनफेस्ट-वर्चस्व:

सितंबर 08-09, 2018

अक्टूबर 4-5 & 08-13, 2018

अक्टूबर 28/ Nov 04, 2018

नवंबर 16-18, 2018

नॉस्टॉल्जिया:

अंतिम प्लेसमेंट:

टेडेक्स:

दिसंबर 21-23, 2018

जनवरी 28- फरवरी 04, 2019

फरवरी 17, 2019

  • उम्मीदवार के पास कम से कम 50% अंक या समकक्ष सीजीपीए के साथ स्नातक की डिग्री होनी चाहिए।
  • (अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) तथा दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) श्रेणी के उम्मीदवारों के मामले में 45%) भारत या अन्य शिक्षण संस्थान द्वारा, केंद्रीय या राज्य विधायिका के अधिनियम द्वारा स्थापित विश्वविद्यालयों द्वारा प्रदत्त डिग्री। संसदीय अधिनियम द्वारा स्थापित शैक्षणिक संस्थान या यूजीसी अधिनियम, 1956 की धारा 3 के तहत विश्वविद्यालय के रूप में प्रमाणित, या मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा मान्य व समकक्ष योग्यता वाले संस्थान के डिग्री धारक।
  • स्नातक की डिग्री में उम्मीदवार द्वारा प्राप्त अंकों के प्रतिशत की गणना विश्वविद्यालय / संस्थान द्वारा लागू नियम के आधार पर की जाएगी जहां से उम्मीदवार ने डिग्री प्राप्त की है। यदि उम्मीदवारों को अंकों के बजाय ग्रेड / सीजीपीए से सम्मानित किया जाता है, तो ग्रेड / सीजीपीए का प्रतिशत में रूपांतरण विश्वविद्यालय / संस्थान द्वारा प्रमाणित प्रक्रिया पर आधारित होगी, जहां से उम्मीदवार ने स्नातक की डिग्री प्राप्त की है। यदि विश्वविद्यालय / संस्थान के पास सीजीपीए को समकक्ष अंकों में परिवर्तित करने के लिए कोई योजना नहीं है, तो उम्मीदवार के सीजीपीए को अधिकतम संभव सीजीपीए से विभाजित करके और परिणाम को 100 के साथ गुणा करके समानता स्थापित की जाएगी।
  • स्नातक की डिग्री / समकक्ष योग्यता परीक्षा के अंतिम वर्ष के छात्र एवं डिग्री को पूर्ण कर परिणाम के प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवार भी आवेदन कर सकते हैं। यदि ऐसे छात्र चयनित किये जाते हैं, तो ऐसे स्थिति में उम्मीदवार को अस्थायी रूप से कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति दी जाएगी, अगर वह 30 जून, 2019 तक अपने कॉलेज / संस्थान के प्रिंसिपल / रजिस्ट्रार (30 जून, 2019 तक या उससे पहले जारी किए गए) से नवीनतम प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं, जिसमें यह लिखित हो कि उम्मीदवार ने प्रमाण पत्र जारी करने की तिथि पर स्नातक की डिग्री / समकक्ष योग्यता प्राप्त करने के लिए सभी अपेक्षाओं को पूरा किया है।
  • अन्य भारतीय प्रबंध संस्थान चयन प्रक्रिया के विभिन्न चरणों में पात्रता को सत्यापित कर सकते हैं, जिसका विवरण वेबसाइट www.iimcat.ac.inपर उपलब्ध कराया गया है। आवेदक ध्यान दें कि केवल न्यूनतम पात्रता मानदंड की पूर्ति के आधार पर भारतीय प्रबंध संस्थानों द्वारा प्रेवश हेतु अंतिम सूची पर विचार सुनिश्चित नहीं किया जाएगा। उम्मीदवारों से यह अपेक्षा की जाती है कि उनके पास एक वैध तथा अद्वितीय ईमेल खाता और एक फोन नंबर आवश्य हो।
क्रम. विषय डाउनलोड
1. चयन प्रक्रिया साइज: 87 केब | भाषा: अंग्रेजी | अपलोडिंग तिथि: 07/08/2018 डाउनलोड

समकक्ष योग्यताओं की सूची

  • प्रोफेशनल सोसाइटी से अभियांत्रिकी/प्रौद्योगिकी में स्नातक डिग्री (10+2/ बी.एससी./ डिप्लोमा के बाद 4 वर्ष) या बी.ई./बी.टेक समकक्ष परिक्षाएं जिसे एमएचआरडी / यूपीएससी / एआईसीटीई (जैसे इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स – इंडिया द्वारा एएमआईई, इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियर्स इंडिया द्वारा एएमआईसीई)।
  • एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज नई दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त कोई भी योग्यता, जो यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय / संस्थानों द्वारा प्रदान की जाने वाली स्नातक की डिग्री के समकक्ष हो।
  • एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटी नई दिल्ली से प्राप्त होने वाले समतुल्य प्रमाण पत्र से ऊपर के मामलों को शामिल नहीं किया गया है।

आरक्षण

  • भारत सरकार के अनुसार, 15% सीटें अनुसूचित जाति (एससी) के लिए और 7.5% अनुसूचित जनजाति (एसटी) के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हैं। 27% सीटें "नॉन-क्रीमी" लेयर वाले अन्य पिछड़ा वर्ग (एनसी-ओबीसी), और निर्धारित दिव्यांग (पीडब्ल्यूडी) के लिए 5% आरक्षण हैं।
  • आरक्षण तथा क्रिमी लेयर संबंधी सूचना का लाभ उठाने के लिए पात्र ओबीसी, राज्यवार अद्यतन केंद्रीय सूची हेतु वेबसाइट http://www.ncbc.nic.in देखें।
  • एनसी - ओबीसी श्रेणी के मामले में, पिछड़ा वर्ग के राष्ट्रीय आयोग, भारत सरकार द्वारा एनसी - ओबीसी की केंद्रीय सूची http://www.ncbc.nic.in)पर उपलब्ध) में शामिल जातियों के संबंध में, पंजीकरण के अंतिम दिन को किये गए अपडेट का उपयोग किया जाएगा। इसके पश्चात् कोई भी परिवर्तन कैट 2018 के लिए प्रभावी नहीं होंगे।
  • विकलांग व्यक्तियों के अधिकार अधिनियम, 2016 (आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016) में " निर्दिष्ट विकलांगता वाले व्यक्ति" के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसका अर्थ निर्दिष्ट विकलांगता- चालीस प्रतिशत (40%) से कम नहीं है, जिसमें निर्दिष्ट विकलांगता को किसी मानदंड पर परिभाषित नहीं किया गया है, जैसा कि प्रमाणित प्राधिकारी द्वारा प्रमाणित है।
  • दिव्यांगता की श्रेणियां:

  • दृष्टिहीनता एवं मंद दृष्टि,
  • बहरापन एवं सुनने में कठिनाई,
  • सेरेब्रल पाल्सी, कुष्ठ रोग, बौनापन, एसिड अटैक पीड़ित और पेशी अपविकास सहित शारीरिक गतिविधि अशक्तता
  • ऑटिज्म, बौद्धिक अशक्तता, विशिष्ट शिक्षा अशक्तता और मानसिक बीमारी और
  • खंड (ए) से (डी) के अंतर्गत विभिन्न विकलांगता।
  • आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम 2016 की 'अनुसूची' में उल्लिखित अन्य 'निर्दिष्ट विकलांगता'।
  • जिन श्रेणियों के लिए सीटें आरक्षित हैं उनसे संबंधित उम्मीदवारों को आवेदन से पहले पात्रता आवश्यकताओं को ध्यान से पढ़ना विशेष रूप से आवश्यक है। यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह भारतीय प्रबन्ध संस्थानों का प्रयास है कि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति / पीडब्ल्यूडी / नॉन- क्रिमी ओबीसी श्रेणियों के उम्मीदवार विधि द्वारा निर्देशित अनुपात में, कार्यक्रम में शामिल हों, तथा संबंधित उम्मीदवारों से अपेक्षा की जाती है कि वे न्यूनतम पात्रता मानदंड और प्रवेश प्रक्रिया में न्यूनतम प्रदर्शन स्तर को पूरा करें।
  • उम्मीदवारों को प्रत्येक भारतीय प्रबन्ध संस्थान द्वारा संचालित तथा संबंधित वेबसाइट का अनुसरण करते हुए प्रवेश प्रक्रिया का विवरण ध्यान से पढ़ना चाहिए। पंजीकरण विंडो बंद होने के बाद श्रेणी में कोई परिवर्तन नहीं किया जाएगा। इसलिए, आवेदकों हेतु सुझाव है कि वे पंजीकरण करते समय ध्यान दें।
क्र.सं. विषय डाउनलोड
1. Policy Size: 425 KB | Lang: English | Uploading Date: 15/03/2018 Click here to View

कैट संबंधित विज्ञापन का प्रकाशन राष्ट्रीय दैनिक समाचार प्रत्रों में जुलाई या अगस्त माह में किया जाता है।

सामान्य प्रवेश परीक्षा (कैट) एक कंप्यूटर आधारित (सीबीटी) परीक्षा है। कैट संबंधी अन्य विवरण के लिए वेबसाइट www.iimcat.ac.inदेखें।

कैट, शैक्षिक तथा संबंधित कार्यानुभव में प्रदर्शन के आधार पर अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए शार्टलिस्ट किया जाता है। इसके बाद, बेंगलोर, कोलकाता, मुम्बई, नई दिल्ली तथा हैदराबाद में लिखित दक्षता परिक्षा (डब्ल्यएटी) तथा व्यक्तिगत साक्षात्कार (पीआई) फरवरी माह के अंत में संचालित किए जाते हैं। कैट में प्रदर्शन, शैक्षणिक उपलब्धि, कार्य अनुभव तथा लिखित योग्यता परीक्षा (डब्ल्यूएटी) और व्यक्तिगत साक्षात्कार (पीआई) में प्रदर्शन के आधार पर अंतिम चयन है।

क्र.सं. गतिविधियां निर्धारित तिथि
1 विज्ञापन जारी 29 जुलाई, 2018 (रविवार)
2 कैट हेतु ऑनलाइन पंजीकरण 08 अगस्त, 2018 से 19 सितंबर, 2018, 05:00 पी.एम.
3 प्रवेश पत्र डाउनलोड विंडो 24 अक्टूबर, 2018 से 25 नवंबर, 2018
4 परीक्षा दिनांक 25 नवंबर 2018 (रविवार)
5 कैट परिणाम जारी जनवरी माह का दूसरा सप्ताह, 2019 (संभावित)

डिमांड ड्राफ्ट

ऑनलाइन ट्रांसफर

विश्व स्तरीय पेशेवर बनाने के लिए, उन्हें विश्व का प्रत्यक्ष अनुभव आवश्यक है। विकसित एवं विकासशील जगत के बीच के संस्कृति व आर्थिक अंतर संबंधित सूचनाएं केवल कक्षाओं में नहीं प्रदान की जा सकती है। इसके लिए छात्रों को विदेशी देशों की यात्रा करनी होगी जिससे कि वहां के गुणों को चिन्हित व अपनाया जा सके।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए भारतीय प्रबन्ध संस्थान लखनऊ का अंतरराष्ट्रीय पह - एक प्रक्रिया है जिसके माध्यम से हमारे छात्र विश्व भर के बिजनेस स्कूलों में अपनी पढ़ाई का एक हिस्सा पूरा करते हैं। विनिमय के तौर पर विदेशी छात्र और शिक्षक भाप्रसं. लखनऊ आकर विश्व के संभावित सबसे बड़े बाजारों में से एक भारत की कार्यशैली और दृष्टिकोण को समझते हैं।

क्र.स विषय डाउनलोड
1. International Student Exchange Programme – Application Form (Incoming students) Size: 654 केबी | Lang: English | Uploading Date: 15/03/2018 Click here to View
क्र.स विषय डाउनलोड
1. शुल्क संरचना - वर्ष 2017-2019 के लिए पीजीपी एवं पीजीपी-एबीएम-1 एवं 2 साइज: 654 केबी | भाषा: अंग्रेजी | अपलोडिंग तिथि: 15/03/2018 डाउनलोड

वित्तीय सहायता

संस्थान की वित्तीय सहायता योजनाओं का उद्देश्य पर्याप्त वित्तीय सहायता के अवसर प्रदान करना है, ताकि किसी भी छात्र को वित्तीय बाधाओं के कारण कार्यक्रम में कठिनाई न हों। वर्तमान में उपलब्ध योजनाएं हैं:

    • आवश्यकता आधारित भाप्रसं. लखनऊ की छात्रवृत्ति :

      संस्थान ने योग्यता और पारिवारिक आय के आधार पर छात्रों के लिए छात्रवृत्ति की स्थापना की है। कोई भी छात्र जिसमें आरक्षित वर्ग से संबंधित छात्र भी शामिल है, जिनकी वर्ष 2017-18 के लिए कुल वार्षिक सकल पारिवारिक आय (स्वयं, माता-पिता, पति / पत्नी) (1.4.2017-31.3.2018) 4,00,000.00/- रुपये से अधिक न हो। इन छात्रवृत्ति हेतु विचारणीय हैं। लाभार्थियों को योग्यता के क्रम में पात्र उम्मीदवारों में से चुना जाता है, जो एक समय में एक शैक्षणिक वर्ष की अवधि के लिए होता है।

      वित्तीय सहायता शुल्क माफी के रूप में होगी और शैक्षणिक प्रदर्शन के निर्धारित मानकों को बनाए रखने के अधीन है।

    • अन्य

      छात्र उच्च अध्ययन के लिए विभिन्न केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और अन्य निकायों द्वारा स्थापित विभिन्न अन्य छात्रवृत्ति का लाभ उठा सकते हैं। इससे संबंधित विवरण राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल या एनएसपी - http://www.scholarships.gov.in तथा संबंधित राज्य पोर्टल आदि पर उपलब्ध हैं।

    • शुल्क अदायगी विकल्प

    • डिमांड ड्राफ्ट:

      ऑनलाइन हस्तांतरण:

पीजीपी प्रवेश

भारतीय प्रबन्ध संस्थान

प्रबन्ध नगर, आईआईएम रोड, लखनऊ-226013 उत्तर प्रदेश, भारत

परिसर ईपीएबीएक्स

सीधे ऑपरेटर को – 2734101
ऑपरेटर द्वारा – 2734111 – 20

नगर कार्यालय 2745397 , 2746437
फैक्स

2734005 (निदेशक कार्यालय), 2734025 (सामान),
2734026 (एमडीपी);

आईएसडी कोड 91
एसटीडी कोड 522

Content will be available soon.